पंचकूला। सेक्टर-10 स्थित में आयोजित वार्षिक मूर्ति स्थापना उत्सव के समापन अवसर पर कथावाचक ने कहा कि प्रभु नाम की महिमा असीम, अनंत और पाप-दुःख नाशक है। उन्होंने कहा कि निष्काम भाव से किया गया नाम जप हृदय की मलिनता को दूर कर मानसिक शांति, भगवत प्रेम और मोक्ष प्रदान करता है। स्वामी ने कहा कि ईश्वर हमारे सबसे निष्ठावान साथी हैं और उनका स्मरण जीवन के हर संकट में सहारा देता है। नाम जप के लिए किसी विशेष नियम या कठिन साधना की आवश्यकता नहीं, यह सबसे सरल और सुलभ मार्ग है। उन्होंने शास्त्रों का उल्लेख करते हुए कहा कि गंगा, काशी और गया जैसे तीर्थ भी राम नाम की महिमा के समकक्ष नहीं माने गए हैं।
प्रवचन के दौरान उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता का उदाहरण देते हुए कहा कि सच्चे प्रेम में ऊंच-नीच, अमीरी-गरीबी का भेद नहीं होता। यही कारण है कि आज भी कृष्ण-सुदामा की मित्रता को आदर्श माना जाता है। कलियुग के दुर्गुणों का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि जुआ, मद्यपान, वेश्यावृत्ति, हिंसा और अनीति से कमाया गया धन ऐसे स्थान हैं जहां कलियुग का वास माना गया है। कथा के समापन पर स्वामी जी और उनके पुत्र स्वामी कमल राम जी दास वशिष्ठ के भजनों पर श्रद्धालु झूम उठे। कार्यक्रम का समापन पूजन, आरती और प्रसाद वितरण के साथ हुआ।