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आवेश में हुई लड़ाई, नहीं था कोई हथियार, हत्या नहीं गैर इरादतन हत्या का मामला: हाईकोर्ट

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चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने हत्या का दोषी ठहराए गए व्यक्ति की उम्रकैद की सजा के खिलाफ अपील पर सुनवाई करते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि मौत आवेश में हुई लड़ाई का नतीजा थी। आरोपी के पास कोई हथियार भी मौजूद नहीं था। यह हत्या का नहीं गैर-इरादतन हत्या का मामला बनता है। इस टिप्पणी के साथ ही हाईकोर्ट ने उम्रकैद की सजा को बदलते हुए कहा कि याची की अभी तक काटी गई सजा ही काफी है और उसे अब रिहा कर दिया जाए। याचिका दाखिल करते हुए लुधियाना निवासी हरे राम ने हाईकोर्ट को बताया था कि 17 अप्रैल, 2006 को उसका वज्र राय के साथ एक डेयरी में काम को लेकर झगड़ा हो गया था। इसके बाद हाथापाई के दौरान एक ईंट का वार वज्र को लगा था और बाद में इसके कारण उसकी मौत हो गई थी। इस मामले में लुधियाना की अदालत ने याची को हत्या का दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
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हाईकोर्ट ने इस मामले में सभी पक्षों को सुनने के बाद अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि वारदात के दिन अचानक याची व वज्र राय का झगड़ा हुआ था। याची की उससे कोई दुश्मनी नहीं थी और न ही याची की मंशा हत्या की थी। इस घटना के दौरान याची के पास पहले से कोई हथियार भी मौजूद नहीं था। झगड़े के दौरान आवेश में आकर उसने पास मौजूद ईंट वज्र राय के सिर पर मार दी जिससे बाद में उसकी मौत हो गई। यह मामला हत्या का नहीं है बल्कि गैर-इरादतन हत्या का है।
हाईकोर्ट ने इसके बाद सजा पर गौर किया और कहा कि याची अब तक 16 साल जेल में बिता चुका है और इस बीच उसकी सजा भी निलंबित नहीं हुई थी। ऐसे में याची ने अभी तक जो सजा काटी है अपराध के लिए यह काफी है। हाईकोर्ट ने याची की काटी गई सजा को ही पर्याप्त मानते हुए उसे रिहा करने का आदेश दिया है।
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