संयुक्त राष्ट्र महासभा की समिति में भारत ने दोहराई परमाणु निरस्त्रीकरण की प्रतिबद्धता, एआई के इस्तेमाल पर जताई चिंता
भारत ने परमाणु खतरे कम करने के लिए चरणबद्ध, भेदभाव रहित और जांच योग्य व्यवस्था बनाने पर दिया जोर
माई सिटी रिपोर्टर
चंडीगढ़। परमाणु हथियारों के इस्तेमाल का फैसला केवल इंसानों को करना चाहिए। इनके संचालन और नियंत्रण में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल उठाते हुए चंडीगढ़ से सांसद और पूर्व केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी ने परमाणु हमले के खतरे को कम करने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग की जरूरत बताई। उन्होंने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा की पहली समिति में भारत का पक्ष रखते हुए वैश्विक परमाणु निरस्त्रीकरण के प्रति देश की प्रतिबद्धता दोहराई।
तिवारी ने कहा कि परमाणु निरस्त्रीकरण की व्यवस्था सभी देशों के लिए समान, भेदभाव रहित और जांच योग्य होनी चाहिए। इसके लिए सभी देशों को चरणबद्ध तरीके से मिलकर काम करना होगा। उन्होंने कहा कि भारत विश्वसनीय न्यूनतम परमाणु प्रतिरोध की नीति पर चलता है। भारत पहले परमाणु हमला नहीं करने और गैर-परमाणु हथियार वाले देशों के खिलाफ परमाणु हथियारों का इस्तेमाल नहीं करने के सिद्धांत पर कायम है। भारत इन प्रतिबद्धताओं को अंतरराष्ट्रीय कानूनी समझौतों का हिस्सा बनाने के लिए तैयार है।
परमाणु हमले का खतरा कम करने पर जोर
तिवारी ने परमाणु हथियारों को हर समय हमले के लिए तैयार रखने की व्यवस्था में बदलाव की जरूरत बताई। इससे गलती या दुर्घटना के कारण परमाणु हमला होने का खतरा कम किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि भारत 1998 से परमाणु खतरे कम करने संबंधी प्रस्ताव पेश करता रहा है। वर्ष 1992 से भारत परमाणु हथियारों के इस्तेमाल या इस्तेमाल की धमकी पर रोक लगाने वाली अंतरराष्ट्रीय संधि के लिए बातचीत शुरू करने की मांग भी करता रहा है।
आतंकियों की पहुंच रोकने के लिए सहयोग जरूरी
तिवारी ने कहा कि भारत परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने के लिए प्रतिबद्ध है। आतंकवादियों और अन्य गैर-सरकारी समूहों की परमाणु हथियारों, सामग्री और तकनीक तक पहुंच रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग जरूरी है। उन्होंने सदस्य देशों से परमाणु खतरे कम करने वाले प्रस्तावों का समर्थन करने की अपील की। साथ ही कहा कि भारत की रक्षा क्षमताएं उसकी सुरक्षा जरूरतों के अनुरूप हैं।