माई सिटी रिपोर्टर
पंचकूला। शहर में लगातार गिरते भूजल स्तर के बीच नगर निगम अब पानी की आपूर्ति करने वाले 200 ट्यूबवेलों की क्षमता और स्थिति का आकलन करवाएगा। एचएसवीपी से निगम को हस्तांतरित इन ट्यूबवेलों का विस्तृत तकनीकी सर्वे एक्सपर्ट कंसल्टेंट की मदद से कराया जाएगा।
इसमें ट्यूबवेलों की मौजूदा स्थिति, पानी निकालने की क्षमता और भूजल स्तर की जांच होगी। रिपोर्ट के आधार पर भविष्य की जलापूर्ति और रखरखाव की योजना तैयार की जाएगी। शहर में पानी की बढ़ती मांग के बीच भूजल पर निर्भरता चुनौती बनी हुई है। एचएसवीपी से मिली जानकारी के अनुसार, एमडीसी क्षेत्र में भूजल स्तर 500 से 600 फीट तक नीचे पहुंच गया है, जबकि अन्य हिस्सों में यह 400 से 500 फीट तक है। ऐसे में ट्यूबवेलों की वास्तविक क्षमता जानना जरूरी हो गया है।
हर ट्यूबवेल की उम्र और क्षमता का होगा आकलन: सर्वे में प्रत्येक ट्यूबवेल की उम्र, मोटर क्षमता, पाइपलाइन नेटवर्क और पानी के डिस्चार्ज का ब्योरा जुटाया जाएगा। इससे खराब ट्यूबवेलों की पहचान, मरम्मत और तकनीकी सुधार की जरूरत का पता चलेगा। भूजल स्तर का रिकॉर्ड भी तैयार होगा। हालांकि, ट्यूबवेल कितने साल तक पानी दे सकेंगे, यह सर्वे के निष्कर्षों और भूजल की उपलब्धता पर निर्भर करेगा।
गर्मियों में 200 एमएलडी तक मांग: वार्ड नंबर चार के पार्षद भारत हितैषी ने बताया कि शहर में सामान्य तौर पर पानी की मांग करीब 170 एमएलडी है, जो मई-जून में 200 एमएलडी तक पहुंच जाती है। कजौली से करीब 45 एमएलडी पानी मिलता है। शेष जरूरत पूरी करने के लिए भूजल पर निर्भरता बनी हुई है। उन्होंने कहा कि गिरते भूजल स्तर को देखते हुए सर्वे जरूरी है। इस प्रस्ताव को उन्होंने अपने एजेंडे में भी शामिल किया है और यह हाउस की बैठक में उठेगा। सेक्टर-9 और 10 में एक-एक ट्यूबवेल लगाने की मांग भी की गई है।