अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) के पुनर्गठन को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। केंद्र सरकार ने हिमाचल प्रदेश और राजस्थान को भी बोर्ड में प्रतिनिधित्व देने का प्रस्ताव तैयार किया है जिस पर सभी सहयोग राज्यों से फीडबैक मांगा गया है। अभी फिलहाल पंजाब और हरियाणा ही बोर्ड में स्थायी सदस्य हैं।
आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब ने केंद्र के इस प्रस्ताव का विरोध किया है। आप पंजाब प्रवक्ता नील गर्ग ने कहा कि भाजपा बीबीएमबी में पंजाब के अधिकारों को कमजोर करने की साजिश रच रही है। यह प्रदेश के सांविधानिक और पानी के अधिकारों पर सीधा हमला है। केंद्र सरकार का यह कदम उसके पंजाब विरोधी एजेंडे को बेनकाब करता है। केंद्र सरकार ने एक पत्र पंजाब, हरियाणा, हिमाचल और राजस्थान के मुख्य सचिवों को भेजा है जिसमें हिमाचल और राजस्थान को स्थायी रूप से बीबीएमबी में शामिल करने का प्रस्ताव है। यह पंजाब के साथ एक और विश्वासघात है।
गर्ग ने कहा कि पंजाब ने ऐतिहासिक रूप से बीबीएमबी के खर्च का 40% से अधिक हिस्सा उठाया है, फिर भी भाजपा बार-बार पंजाब के अधिकारों को हड़पने की कोशिश कर रही है। इससे पहले भाजपा ने बीबीएमबी के माध्यम से पंजाब के नहरी पानी के हिस्से को हरियाणा को स्थानांतरित करने की कोशिश की थी। भाजपा नेता सुनील जाखड़, रवनीत बिट्टू और अश्विनी शर्मा को जवाब देना चाहिए कि क्या वे इस पंजाब विरोधी बीबीएमबी के फैसले का समर्थन करते हैं।
आप प्रवक्ता ने कहा कि इस फैसले को किसी भी हालत में स्वीकार नहीं किया जाएगा। आप पंजाब इसका कड़ा विरोध करेगी। केंद्र की भाजपा सरकार ने राहत कोष में 1,600 करोड़ रुपये का वादा किया था, लेकिन आज तक एक भी रुपया नहीं भेजा गया।