चंडीगढ़। जिला परिषद और ब्लॉक समिति चुनाव में पटियाला के एसएसपी वरुण शर्मा के खिलाफ गंभीर आरोपों और ऑडियो-वीडियो रिकार्डिंग के आधार पर दायर जनहित याचिकाओं की सुनवाई करते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने राज्य चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया।
हाईकोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग का आचरण न केवल निष्पक्ष होना चाहिए बल्कि जनता की नजरों में निष्पक्ष दिखाई देना चाहिए। किसी भी स्तर पर पक्षपात की आशंका चुनाव प्रक्रिया को दूषित कर सकती है। इसे शुरू में ही समाप्त कर देना आयोग की जिम्मेदारी थी। सुनवाई के दौरान आयोग ने बताया कि शिकायतकर्ताओं द्वारा दी गई ऑडियो-वीडियो रिकार्डिंग की जांच के लिए एडीजीपी की अध्यक्षता में एक समिति बनाई गई है और सामग्री एसएफएल को भेज दी गई है। अदालत ने कहा कि बेहतर होता कि आयोग शुरुआत से ही इन रिकार्डिंग्स की जांच किसी बाहरी, पूर्ण रूप से निष्पक्ष एजेंसी को सौंपता ताकि चुनावी निष्पक्षता पर न तो कोई सवाल उठता और न ही किसी अधिकारी के पक्ष में झुकाव का संदेह पैदा होता। राज्य चुनाव आयोग ने अदालत को जानकारी दी कि एसएसपी वरुण शर्मा को 10 से 17 दिसंबर तक अवकाश पर भेज दिया है। एसएसपी संगरूर सरताज सिंह चहल को पटियाला का अतिरिक्त चार्ज सौंपा गया है। अदालत ने इस कार्रवाई को सही दिशा में उठाया कदम बताते हुए कहा कि आरोप गंभीर होने के कारण अधिकारी का चुनाव ड्यूटी से दूर रहना उचित है।
गैर पक्षपाती तरीके से कार्य करें पुलिसकर्मी
हाईकोर्ट ने राज्य चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि तुरंत सभी एसएचओ और चुनाव ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों को आदेश जारी करें कि वे पूरी तरह गैर-पक्षपाती तरीके से कार्य करें। अदालत ने यह उम्मीद भी जताई कि आयोग चल रही जांच को राजनीतिक या बाहरी प्रभावों से मुक्त रखते हुए निष्पक्षता से पूरा करेगा। तीनों याचिकाओं पर आगे सुनवाई 22 दिसंबर को होगी, जब अदालत आयोग और जांच समिति की अगली रिपोर्ट पर विचार करेगी।