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लोगों की मांग पर रात को जगमगाने लगा शहर का गांधी चौक

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कालका। शहर के गांधी चौक में लगे हाई मास्ट लाइटिंग पोल की लाइटें लंबे समय से बंद रहने के कारण रात में यहां पर अंधेरा पसरा रहता था। इस कारण लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। पोल पर लगी लाइटें न जलने के कारण शाम ढलते ही गांधी चौक में अंधेरा छा जाता था। स्थानीय लोग इसको ठीक करवाने की मांग करते आ रहे थे। लोगों की मांग को देखते हुए अमर उजाला के संज्ञान में आने के बाद इस मुद्दे को 12 मई को पंचकूला माई सिटी संस्करण में प्रकाशित किया गया था। इसके बाद से प्रशासन ने गांधी चौक पर लगी हाई मास्ट लाइटिंग पोल को व्यवस्थित करवा दिया है और अब पहले की भांति शाम ढलते ही इसकी लाइटोें की रोशनी से गांधी चौक जगमगाने लगा है। इस समस्या का समाधान करवाने पर स्थानीय निवासी शमित कुमार, लक्की, रवि, अनिल, बलकार सिंह, ललित और डॉ. कश्मीरा सिंह सहित अन्य ने प्रशासन और अमर उजाला का आभार व्यक्त किया है।
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शहर के दिल से पुकारा जाता है गांधी चौक
गांधी चौक शहर का दिल कहलाया जाता है। हर समय यह रोड व्यस्त रहती है दिन हो या रात यहां पर लोगों की चहल पहल लगी रहती है। ऐसे में शाम के समय यहां पर अंधेरा छा जाता था, इस कारण कभी भी कोई दुर्घटना होने का भय बना रहता था। गांधी चौक का अपना एक इतिहास है, बता दें कि कई वर्षों पहले गांधी चौक पर ही स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस मनाया जाता था और करीब चार से पांच दशक पहले बस अड्डा भी यहीं पर होता था। इसके अलावा देश के बड़े राजनेताओं की जनसभा का गवाह भी गांधी चौक रह चुका है। चंडीगढ़, शिमला, रेलवे स्टेशन और त्रिमूर्ति धाम बालाजी मंदिर को भुजाएं इस डिवाइडर से ही निकलती हैं।
देर रात यहां अंधेरे में गुजरने से बचते थे लोग
बता दें कि देर रात लोग इस कालका गांधी चौंक से गुजरने से बचते थे, क्योंकि यहां पर घुप अंधेरा पसरा रहता था। ऐसे में किसी वारदात के होने का डर बना रहता था। इतना ही नहीं रात के समय लोग यहां पर कूड़ा-करकट फेंक देते थे। इस कारण यहां पर लावारिस पशुओं का जमावड़ा लगा रहता है और सड़क के किनारे पशु झुंड बनाकर खड़े रहते हैं और गंदगी के ढेर में मुंह मारते देखे जा सकते हैं। ऐसे में लाइटें न जलने के कारण रात के समय यहां से लोगों, विशेषकर बच्चों और बुजुर्गों का निकलना दुश्वार हो गया था। क्योंकि अंधेरा होने के कारण लावारिस पशुओं के हमला करने की संभावना बनी रहती थी। इतना ही नहीं हाई मास्ट लाइटिंग पोल की लाइटें बंद रहने के कारण महिलाएं रात को यहां से निकलने में गुरेज करने लगी थीं।
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