चंडीगढ़। पंजाब में पराली को जलाने से होने वाले वायु प्रदूषण को रोकने के लिए राज्य सरकार गंभीर है। सरकार ने इसके लिए एक्शन प्लान बनाया हुआ है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने कहा कि पंजाब में पराली जलाने के केसों को 50 प्रतिशत तक कम करने का लक्ष्य रखा गया है जबकि छह जिलों में पराली जलाने को पूरी तरह से खत्म करना है।
इन जिलों में होशियारपुर, मालेरकोटला, पठानकोट, रूपनगर, एसएएस नगर (मोहाली) और एसबीएस नगर शामिल हैं। राज्य में लगभग 31 लाख हेक्टेयर भूमि पर धान की खेती होती है। इससे लगभग 16 मिलियन टन धान का भूसा (गैर-बासमती) उत्पन्न होने की उम्मीद है। जिसका प्रबंधन इन-सीटू (फसल अवशेषों को खेतों में मिलाना) और एक्स-सीटू (पराली को ईंधन के रूप में उपयोग करना) तरीकों से किया जाएगा।
धान की पराली का उपयोग औद्योगिक और ऊर्जा उत्पादन परियोजनाओं में करने के प्रयास किए जा रहे हैं। सीएक्यूएम ने कहा कि बड़ी मात्रा में भूसे का उपयोग पशु चारे के रूप में भी किया जाएगा।