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हालात : सड़क न अस्पताल, जिंदगी को चाहिए चार कंधे और एक खाट

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पंचकूला। मोरनी खंड के एक दर्जन से अधिक गांव आज भी सड़क, अस्पताल, मोबाइल नेटवर्क जैसी समस्याओें से जूझ रहे हैं। हालात इस कदर बदतर हैं कि बीमार होने पर ग्रामीणों को करीब 20 से 22 किलोमीटर दूर रायपुररानी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र आना पड़ता है। पथरीली और संकरे रास्तों से होकर लोग मरीज को चारपाई में लेकर अस्पताल पहुंचते हैं तो सरकार के दावे धरे के धरे रह जाते हैं। इन गांवों के आसपास तक सड़क मार्ग नहीं पहुंचने से विकास यहां से बहुत दूर है। मोबाइल नेटवर्क नहीं मिलने के कारण लोग मुसीबत में किसी की मदद भी नहीं ले सकते।
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अमर उजाला की टीम ने शनिवार को इन क्षेत्रों का दौरा किया तो क्षेत्र की परेशानियाें से इस तरह मुखातिब हुए। पहाड़ियों की गोद में बसे गांव डांडयो, गुल्लरवाली, बजीरीवाला, घाटा, सिंगवाला, कमराहड़ी, नींबवाल की आबादी एक हजार है। टीम पथरीले रास्ते से होकर डांडयो से आगे बढ़ी तो चार युवक खाट पर एक युवक को लेकर जाते मिले। पूछने पर पता चला कि युवक बीमार है, उसे अस्पताल लेकर जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि गांव में एंबुलेंस नहीं आती। बीमार लोगों को इसी तरह अस्पताल पहुंचाया जाता है। हैरान परेशान टीम आगे बढ़े तो सिर पर बोरी लादे एक ग्रामीण मिला। उसने बताया कि घरेलू सामान सिर पर ढोकर ही लेकर जाना पड़ता है। आवागमन का कोई अन्य साधन नहीं है।
तीन बार सीएम को दिया ज्ञापन, फिर भी नहीं मिला रास्ता
पूर्व सरपंच और जिला परिषद सदस्य जय सिंह ने बताया कि डांडयो से नींबवाला तक पांच किलोमीटर रास्ता बन जाए तो डांडयो, गुल्लरवाली, बजीरीवाला, घाटा, सिंगवाला, कमराहड़ी के हजारों लोगों को राहत मिलेगी। रास्ते के निर्माण से मोरनी और हिमाचल जाना आसान हो जाएगा। अभी करीब 50 किलोमीटर सफर वाया रायपुररानी मोरनी के लिए तय करना पड़ता है, वहीं नींबवाला पुल से रास्ता जुड़ने के बाद मोरनी के लिए करीब 25 किलोमीटर रास्ता शेष रह जाएगा। रास्ते के निर्माण को लेकर प्रदेश के मुख्यमंत्री को तीन बार ज्ञापन दे चुके हैं, लेकिन इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
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दुआ करते हैं कोई बीमार न हो
रीतू रानी ने बताया कि गुल्लरवाली, बजीरीवाला, घाटा, सिंगवाला, कमराहड़ी के बीमार लोगों को अस्पताल तक ले जाने के लिए कोई विकल्प नहीं है। यहां के लोग इलाज से ज्यादा दुआ पर विश्वास करते हैं। क्योंकि रास्ता नहीं होने की वजह से बीमार को अस्पताल तक ले जाने के लिए पहले तीन से चार किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है, उसके बाद अस्पताल के लिए साधन मिलता है।
छह गांवों के गम
- गुल्लरवाली, बजीरीवाला, घाटा, सिंगवाला, कमराहड़ी में रास्ता नहीं
- बीमार को चारपाई पर 5 किलोमीटर पैदल लेकर जाते हैं गांव के लोग
- गांव के बच्चे भी रोजाना तीन से चार किलोमीटर पैदल पहुंचते हैं स्कूल
- गर्भवती महिलाओं को टीकाकरण के लिए तीन से चार किलोमीटर पथरीले रास्ते से होकर बाल्दवाला तक आना पड़ता है।
मोबाइल नेटवर्क तक नहीं
डांडयो निवासी रीना, उर्मिला, जमेरोदेवी, पूनम ने बताया कि गांवों (डांडयो, गुल्लरवाली, बजीरीवाला, घाटा, सिंगवाला, कमराहड़ी, नींबवाल) में मोबाइल नेटवर्क नहीं है। कोई भी मोबाइल टावर आसपास नहीं है। मोबाइल पर बात करनी हो तो घर से दो से तीन किलोमीटर बाल्दवाला तक जाना पड़ता है। मुसीबत के समय गांव के लोग किसी से मदद भी नहीं मांग सकते।
देश की आजादी के 70 साल बाद भी मोरनी खंड के कई गांव ऐसे हैं, जहां रास्ता नहीं है। जिसके चलते लोगों को शहर तक आने और जाने में परेशानी होती है। प्रदेश सरकार के समक्ष विधानसभा सत्र के दौरान इस मसले को उठा चुका हूं। - प्रदीप चौधरी, विधायक, कालका।
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