चंडीगढ़। बंदी सिंहों की रिहाई के मुद्दे को लेकर अब शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) ने एक साझा मुहिम को शक्ल देने की तैयारी शुरू कर दी है। श्री कलगीधर निवास में एसजीपीसी द्वारा बुलाई गई बुद्धिजीवियों और कानूनी विशेषज्ञों की विशेष सभा में यह आम राय बनी कि इस मुद्दे को एक संयुक्त अभियान के रूप में आगे बढ़ाया जाए।
इस बैठक के बाद एसजीपीसी के अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी ने कहा कि बंदी सिंहों के मामले में राष्ट्रीय और मानवीय संवेदनाएं रखने वाले और मानवाधिकारों से जुड़े लोगों की एक बड़ी बैठक जल्द बुलाई जाएगी। इसमें भारत के सभी हिस्सों के अलावा विदेशों से भी लोग शामिल होंगे। इस बैठक में केवल सिख हीं नहीं, अन्य धर्मों के लोग भी हिस्सा लेंगे।
बुद्धिजीवियों और कानूनी विशेषज्ञों की बैठक के बारे में जानकारी देते हुए धामी ने कहा कि अनेक बहुमूल्य सुझाव प्राप्त हुए हैं, जिनके आधार पर एसजीपीसी अपनी अगली रणनीति का खाका खींचेगी। फिलहाल आरंभिक तौर पर कुछ कार्यक्रम शुरू करने पर सहमति बनी है और इसी कड़ी में अब एसजीपीसी राष्ट्रीय और मानवीय संवेदनाएं रखने वाले लोगों से संपर्क कायम करेगी। बंदी सिंहों की रिहाई के लिए एक जोरदार प्रचार मुहिम भी शुरू की जाएगी, जिसमें दुनिया को बताया जाएगा कि सिख बंदी कोई पेशेवर अपराधी नहीं थे, बल्कि इन्होंने कौम पर जुल्म की भावनाओं में बहकर कदम उठाए थे। उन्होंने कहा कि बंदी सिंहों के साथ हो रहे भेदभाव को हर मंच पर उठाया जाएगा। बहुभाषी वृत्तचित्र तैयार करके प्रसारित किए जाएंगे, ताकि पूरी दुनिया के लोग जान सकें कि भारत में सिखों के मानवाधिकारों का किस प्रकार उल्लंघन किया जा रहा है।