पंचकूला। सिंधु घाटी और हड़प्पा संस्कृति की दास्तां सुनाने वाले राज्य पुरातत्व संग्रहालय का काम अधर में लटक गया है। इसका कारण संग्रहालय की बिल्डिंग के निर्माण कार्य शुरू होने के साढ़े तीन साल बाद हरियाणा पुरातत्व विभाग द्वारा आंतरिक संरचना की ड्राइंग में बदलाव करना है। इस वजह से 55 करोड़ की लागत से सेक्टर-5 में बनने वाले संग्रहालय का काम डेढ़ माह से बंद पड़ा है। अभी तक दो बेसमेंट सहित सात मंजिल बिल्डिंग की इमारत तैयार हो चुकी है। प्रोजेक्ट को लेकर हरियाणा पुरातत्व विभाग और लोक निर्माण (भवन और सड़कें) विभाग के बीच बैठक भी हुई थी। विभाग के आर्किटेक्ट ने निरीक्षण भी किया था, लेकिन जब तक प्रोजेक्ट का फाइनल डिजाइन लोक निर्माण विभाग को नहीं मिलता, काम शुरू नहीं होगा। संग्रहालय में हड़प्पा सभ्यता से संबंधित प्राचीन मूर्तियां, स्मारक, सिक्के, हथियार, कवच और पोशाक का संग्रह किया जाएगा। वहीं, राखीगढ़ी के कंकालों को भी देखने का विशेष अवसर मिलेगा, जो इस क्षेत्र की सबसे महत्वपूर्ण पुरातात्विक खोजों में से एक है।
2021 में शुरू हुए प्रोजेक्ट को 2023 अगस्त तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था। निर्धारित समय के साढ़े 19 माह बाद भी प्रोजेक्ट अधर में लटका है। प्रोजेक्ट पर अब तक करीब 35 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। राज्य पुरातत्व संग्रहालय को राज्य वास्तुकला विभाग द्वारा डिजाइन किया गया है और इसका निर्माण लोक निर्माण (भवन और सड़कें) विभाग द्वारा किया जा रहा है। इंटीरियर ड्राइंग समय पर फाइनल नहीं होने के चलते बिजली और पानी का कनेक्शन भी नहीं हो पा रहा है। हरियाणा सरकार ने 2016 में राज्य पुरातत्व संग्रहालय स्थापित करने की घोषणा की थी।
अंतरराष्ट्रीय मानचित्र पर पंचकूला को मिलेगी अलग पहचान
यह प्रोजेक्ट राज्य पुरातत्व संग्रहालय हरियाणा की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की झलक दिखाएगा और पंचकूला को अंतरराष्ट्रीय मानचित्र पर एक अलग पहचान दिलाएगा। भवन के भूतल और प्रथम, द्वितीय और तृतीय तल पर संग्रहालय दीर्घा और चतुर्थ तल पर ई-लाइब्रेरी स्थापित करने का प्रस्ताव है। संग्रहालय सदियों पुरानी हड़प्पा सभ्यता के संग्रह को प्रदर्शित करने के अलावा हमारे उन स्वतंत्रता सेनानियों की जीवनी को भी प्रदर्शित करेगा, जिन्होंने विभिन्न स्वतंत्रता आंदोलनों में जीवन का बलिदान दिया है। इसमें पहली तीन मंजिलों पर 9 से 12 गैलरी होंगी, जिनमें हरियाणा की प्रागैतिहासिक, आद्य-ऐतिहासिक (सिंधु-सरस्वती सभ्यता), प्रारंभिक ऐतिहासिक, मध्यकालीन, औपनिवेशिक और आधुनिक काल की यात्रा का विवरण होगा। प्रदर्शनियों में राखीगढ़ी, अग्रोहा, सुघ, करसोला और कुणाल जैसे प्रमुख पुरातात्विक स्थलों से प्राप्त टेराकोटा मूर्तियां, साथ ही करनाल, रेवाड़ी और भिवानी में खोजी गई कुषाण और सल्तनत काल की पत्थर की मूर्तियां और सिक्के शामिल होंगे।
सेक्टर-5 में बनने वाले संग्रहालय की दो बेसमेंट सहित सात मंजिल इमारत तैयार कर दी गई है। अभी हाल ही में हरियाणा पुरातत्व विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक भी हुई थी। आर्किटेक्ट ने बिल्डिंग का निरीक्षण भी किया था। विभाग की ओर से आंतरिक संरचना की ड्राइंग मिलते ही काम शुरू कर दिया जाएगा। -आशीष चौहान, एक्सईएन लोक निर्माण (भवन और सड़कें) पंचकूला