पंचकूला। सिखों के नौवें गुरु श्री तेग बहादुर सिंह के शहीदी दिवस के अवसर पर गुरुद्वारा श्री नाडा साहिब में शहीदी दिवस मनाया गया। हजारों की संख्या में संगत ने गुरुद्वारा साहिब में पहुंचकर शीश नवाया। सुबह से शाम तक दीवान सजाए गए। रागी डाढ़ी कथावाचकों ने संगत को गुरुवाणी और गुरु इतिहास से जोड़ा।
श्री नाडा साहिब के हेडग्रंथी सरदार जगजीत सिंह ने बताया कि औरंगजेब ने सन 1675 में देश से हिंदू धर्म के धार्मिक चिह्नों और मंदिरों को तोड़ना शुरू कर दिया था। जब उनका साथ देने वाला कोई नहीं था तो पंडित कृपाशंकर ने देशभर के लोगों को साथ लेकर गुरु तेग बहादुर से हिंदू धर्म की रक्षा करने की अरदास की। सभी ने उनको अपना गुरु मान लिया।
इसके बाद औरंगजेब तक संदेश भिजवाया गया कि अगर गुरु तेग बहादुर मुस्लिम धर्म अपना लेते हैं तो उनके सभी अनुयायी भी मुस्लिम धर्म को धारण कर लेंगे। इसके बाद औरंगजेब ने गुरु तेग बहादुर को महीनों तक पिंजरों में बंद रखा। उन्होंने औरंगजेब के सामने झुकने से मना कर दिया। इसके बाद औरंगजेब ने कहा कि या तो मुस्लिम धर्म अपना लें या शहादत के लिए तैयार हो जाएं। इस पर गुरु तेग बहादुर ने शहादत को अपनाया।