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कोटक महिंद्रा बैंक एफडी घोटाला: रिलेशनशिप मैनेजर चार दिन के रिमांड पर

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एफडी घोटाले के मामले में कोटक महिंद्रा के बैंक मैनेजर को पेश करने ले जाती एसीबी की टीम।
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145 करोड़ की 16 एफडी में गड़बड़ी, रिकॉर्ड में भारी अंतर एसीबी जांच में सामने आए संदिग्ध खाते
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संवाद न्यूज एजेंसी
पंचकूला। नगर निगम की एफडी से जुड़े करोड़ों रुपये के वित्तीय अनियमितता मामले में कोटक महिंद्रा बैंक के रिलेशनशिप मैनेजर को गिरफ्तार कर चार दिन के पुलिस रिमांड पर भेजा गया है। 145 करोड़ रुपये की 16 एफडी में गड़बड़ी और बैंक रिकॉर्ड में भारी अंतर सामने आने के बाद एसीबी ने जांच तेज कर दी है।
सेक्टर-11 स्थित कोटक महिंद्रा बैंक के रिलेशनशिप मैनेजर दिलीप सिंह राघव को रविवार को अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे चार दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया। आरोपी को मंगलवार शाम करीब 7:30 बजे गिरफ्तार किया गया था।
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16 एफडी में सामने आई गड़बड़ी
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि नगर निगम ने बैंक में 16 एफडी करवाई थीं, जिनकी कुल राशि करीब 145 करोड़ रुपये और मैच्योरिटी वैल्यू लगभग 158 करोड़ रुपये बताई गई है। इनमें से 11 एफडी फरवरी 2026 में मैच्योर हो चुकी थीं, लेकिन बैंक रिकॉर्ड और निगम के दस्तावेजों में बड़ा अंतर मिला है।
जांच में पाया गया कि बैंक स्टेटमेंट और निगम के रिकॉर्ड में रकम मेल नहीं खा रही। एक खाते में जहां करीब 50 करोड़ रुपये होने चाहिए थे, वहां केवल 2.17 करोड़ रुपये ही दर्शाए गए। इसके अलावा कुछ ऐसे बैंक खाते भी सामने आए हैं, जो निगम के आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज नहीं थे।

दस्तावेजों में हेरफेर के संकेत
सूत्रों के अनुसार, प्रारंभिक जांच में वित्तीय गड़बड़ी और दस्तावेजों में हेरफेर के संकेत मिले हैं। इस आधार पर एसीबी ने मामला दर्ज कर गहन जांच शुरू कर दी है। अन्य बैंक अधिकारियों और संबंधित लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
नगर निगम पंचकूला ने भी आंतरिक कमेटी गठित कर सभी एफडी और बैंक खातों का सत्यापन शुरू कर दिया है। जांच में बड़े स्तर पर गड़बड़ी के संकेत मिलने से मामले की गंभीरता बढ़ गई है।
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अन्य गिरफ्तारियों के संकेत
मामले में एडवोकेट गुरसिमर सिंह और नीरज संसानीवाल पैरवी कर रहे हैं। रिमांड के दौरान आरोपी से पूछताछ कर अन्य लोगों की भूमिका का खुलासा किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, अब तक की जांच में एक ऐसे व्यक्ति के खाते में पैसे जाने की बात सामने आई है, जो न तो बैंक कर्मचारी है और न ही नगर निगम से जुड़ा है। इस आधार पर जल्द ही अन्य लोगों की गिरफ्तारी भी हो सकती है।
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