संवाद न्यूज एजेंसी
मोरनी। खंड की नाइटा पंचायत में वन विभाग द्वारा करवाए चार किलोमीटर लंबे रास्ते के निर्माण में धांधली के आरोपों के डेढ़ माह बाद भी जांच के नाम पर ग्रामीणों के हाथ खाली हैं। मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद शुरू कार्य में लगे घोटाले के आरोपों की जांच में अधिकारियों की सुस्ती ग्रामीणों के आरोपों को मजबूती प्रदान करती है। वन विभाग के अधिकारियों की लेटलतीफी ग्रामीणों में चर्चा का विषय है। स्थानीय ग्रामीणों ने कहा कि सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति को वन विभाग के अधिकारी ठेंगा दिखाने का काम कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री हरियाणा ने ग्रामीणों की सुविधा के लिए जो पैसा दिया था उसका लाभ ग्रामीणों को नही मिला है। विरोध करने वाले ग्रामीण चतर सिंह, निर्मल सिंह, संदीप सिंह, शमशेर सिंह, गीत सिंह, बलजीत सिंह ने बताया कि मौजूदा समय में रास्ते की हालत काम शुरू होने से पहले जैसी है। करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी कोई लाभ ग्रामीणों को नहीं मिला है। ग्रामीण बलवंत भींवर का कहना है कि वन विभाग द्वारा करवाया काम निर्धारित ड्राइंग के अनुसार नहीं होता है। मामले में वन राजिक अधिकारी मोरनी सुशील कुमार ने बताया कि यह मामला उनके संज्ञान में है। कोई जांच कमेटी नहीं बनी है।