चंडीगढ़। हरियाणा के विभागों में प्रमुख के पदों पर रोटेशन नीति का सही पालन न होने पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को फटकार लगाते हुए जवाब तलब कर लिया है।
अभियोजन विभाग के अतिरिक्त निदेशक सुखबीर सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए बताया कि हरियाणा सरकार ने विभाग प्रमुखों की रोटेशन के लिए 15 जून 2018 को नीति बनाई थी। इस नीति के अनुरूप विभाग प्रमुखों को तीन साल में बदलने का प्रावधान किया गया था।
याची ने बताया कि सरकार अपनी ही नीति के खिलाफ जाकर काम कर रही है और अधिकारी लंबे समय तक कुर्सियों पर कब्जा जमाए बैठे हैं। याची ने बताया कि अभियोजन विभाग के प्रमुख करीब पांच साल से इस पद पर कार्यरत हैं। निदेशक अभियोजन जुलाई 2019 को तीन साल का कार्यकाल पूरा चुके हैं और ऐसे में पात्र व्यक्ति को इस पद की जिम्मेदारी दी जानी चाहिए। हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद अतिरिक्त गृह विभाग के मुख्य सचिव ने 22 जुलाई को निदेशक अभियोजन (विशेष) और अभियोजन निदेशक (कानूनी) के दो पदों के सृजन के लिए मंजूरी दी थी ताकि पात्र कनिष्ठ अधिकारियों को विभाग प्रमुख बनाया जा सके।
आदेश के बाद भी वर्तमान निदेशक ने अब तक कुछ नहीं किया गया। अभियोजन विभाग के निदेशक की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए हाईकोर्ट ने पूछा है कि अतिरिक्त मुख्य सचिव द्वारा दो पदों के सृजन के लिए मंजूरी के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं की गई।