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रेजिडेंशियल सोसायटी की जमीन पर मॉल बनाने के मामले में उच्च न्यायालय में मौजूद रिकॉर्ड

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चंडीगढ़। रिहायशी सोसायटी के लिए मंजूर भूमि पर कॉमर्शियल भवन (एंबिएंस मॉल) बनाने की अनुमति देने के मामले में पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के आदेश पर सीबीआई ने एफआईआर दर्ज कर जांच आरंभ कर दी है। इसके साथ ही सीबीआई ने न्यायालय को बताया कि उच्च न्यायालय में मौजूद रिकॉर्ड की प्रति हरियाणा सरकार द्वारा मांगी गई है। उच्च न्यायालय ने कागजात की प्रति हरियाणा सरकार को उपलब्ध करवाने के आदेश दिए हैं।
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याचिका दाखिल करते हुए गुरुग्राम निवासी अमिताभ सेन व अन्य ने उच्च न्यायालय को बताया कि जिस भूमि पर एंबिएंस मॉल बना है वह रेजिडेंशियल सोसायटी के लिए मंजूर की गई थी। यहां पर रिहायशी इमारतें निर्माण करने की योजना थी, लेकिन अचानक योजना में बदलाव करते हुए हरियाणा सरकार ने उस स्थान पर कॉमर्शियल इमारत बनाने की मंजूरी दे दी। याचिकाकर्ता ने न्यायालय से अपील की थी कि याचिका लंबित रहते निर्माण कार्य पर रोक लगाई जाए और निर्माण को गिराया जाए।
आम आदमी के अधिकारों का हनन करते हुए बिल्डर को अमीर बनने की अनुमति नहीं दे सकते
5 साल से लंबित इस याचिका पर फैसला सुनाते हुए उच्च न्यायालय ने कहा था कि इस मामले में प्राइवेट बिल्डरों और स्टेट अथॉरिटी के अधिकारियों की मिलीभगत से निर्माण किया गया है। इस तरह के कार्य होने पर उच्च न्यायालय आंखें मूंदे नहीं रह सकता है। अदालत ने कहा कि आम आदमी के अधिकारों का हनन करते हुए किसी बिल्डर को अमीर बनने की अनुमति नहीं दी जा सकती। न्यायालय ने कहा कि जिस प्रकार मनमाने तरीके से रेजिडेंशियल सोसायटी पर कॉमर्शियल भवन का निर्माण किया गया है उससे अनुमति देने की पूरी प्रक्रिया सवालों के घेरे में है। अदालत ने कहा कि इस प्रकार रिहायशी सोसायटी की जमीन को मॉल के लिए देना अधिकारियों पर सवालिया निशान लगाता है, जिसकी जांच आवश्यक है।
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सीबीआई तीन माह की जांच रिपोर्ट भी अदालत को सौंपे
उच्च न्यायालय ने इस मामले में हुडा का सारा रिकॉर्ड न्यायालय के रजिस्ट्रार जुडिशियल के पास सौंपने के आदेश दिए थे। न्यायालय ने जांच को सीबीआई को सौंपते हुए जांच एजेंसी को यह छूट दी थी कि वह उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जूडिशियल से इस रिकॉर्ड को प्राप्त कर कर सकती है। न्यायालय ने कहा था कि इस मामले में सीबीआई को 6 महीने के भीतर अपनी जांच पूरी करनी होगी। इसके साथ ही 3 माह में जांच की सीलबंद रिपोर्ट भी न्यायालय में पेश करनी होगी। अब हरियाणा सरकार ने रिकॉर्ड की प्रति प्राप्त करने के लिए उच्च न्यायालय में अर्जी दाखिल की थी, जिसे मंजूर करते हुए न्यायालय ने प्रति को सौंपने के आदेश दे दिए हैं।
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