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राजीव-इंदिरा कॉलोनी : अलॉटमेंट लेटर जारी होने के बाद आज तक नहीं मिला प्लॉट

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पंचकूला। नारकीय जीवन यापन कर रहे राजीव-इंदिरा कॉलोनी के लोग 35 साल से प्लाट मिलने का इंतजार कर रहे हैं। लेकिन, उन्हें आज तक न तो प्लॉट मिला और न ही फ्लैट नसीब हुआ है। कॉलोनी के लोग प्लॉट के लिए रकम भी जमा करवा चुके हैं। इतना ही नहीं हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण सर्वे करवाने के बाद पात्र लोगों को अलॉटमेंट लेटर भी जारी कर चुके हैं, लेकिन अभी तक कॉलोनी के एक भी व्यक्ति को प्लॉट नहीं मिला है। सरकार और प्राधिकरण के इस रवैये से कॉलोनी के लोगों में रोष है। उनका आरोप है कि सरकार केवल उन्हें वोट के लिए इस्तेमान कर रही है। उन्हें मूलभूत सुविधा उपलब्ध नहीं करवाई जा रही है।
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पूर्व मुख्यमंत्री भजन लाल ने सन 1994 में राजीव-इंदिरा कॉलोनी के पुनर्वास की योजना बनाई थी। इस योजना के तहत कॉलोनी के पात्र लोगों को एक-एक मरले का प्लॉट मिलना था। सरकार ने एक प्लॉट की कीमत मात्र 10 हजार रुपये निर्धारित की थी। एचएसवीपी द्वारा 1994 में एक कमेटी गठित करके सर्वे करवाया। सर्वे में 5553 झुग्गियां मिली थीं और 4149 लाभार्थी परिवारों की पहचान की गई थी। इसमें 3827 लोगों को प्लॉट देने थे। इसमें से 2802 लोगों ने पैसे जमा करवा दिए। इतना ही नहीं एचएसवीपी द्वारा 306 लोगों को अलॉटमेंट लेटर भी जारी कर दिया गया था, लेकिन आज तक किसी भी व्यक्ति को प्लॉट नहीं मिला। जिस जगह पर प्लॉट का कब्जा दिया जाना था वहां जगह आज भी खाली है।
करनाल की तरह चाहिए दो मरले के प्लॉट
राजीव-इंदिरा कॉलोनी के लोग प्रदेश सरकार से करनाल की तरह अब दो मरला प्लॉट की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि जब मुख्यमंत्री मनोहर लाल अपने विधानसभा हलके में झुग्गी-झोपड़ी में रहने वालों को दो-दो मरले का प्लॉट दे सकते हैं तो फिर उन्हें देने में क्या दिक्कत आ रही है। पंचकूला शहर के निर्माण में कॉलोनी के लोगों को बड़ा योगदान रहा है। इस बात को सरकार भी स्वीकार कर रही है। राजीव-इंदिरा कॉलोनी लेबर वेलफेयर एसोसिएशन के महासचिव डॉ. राम प्रसाद ने बताया कि एचएसवीपी के पास प्लॉट के लिए 1.10 करोड़ रुपये कई सालों से जमा हैं। उन्होंने बताया कि सबसे पहले 33 लाख 21 हजार 500 रुपये प्लॉट के लिए जमा करवाए। इसके बाद 76 लाख 75 हजार 500 रुपये फ्लैट के लिए जमा करवाए, लेकिन आजतक प्लॉट और फ्लैट में से कुछ नहीं मिला।
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शहर के दो सेक्टरों में बनेंगे 7400 फ्लैट
सरकार की योजना के अनुसार कॉलोनी के लोगों के पुनर्वास के लिए शहर के दो सेक्टरों में कुल 74 सौ फ्लैट का निर्माण होना है। इसके लिए एचएसवीपी ने टेंडर की तैयारी भी कर ली है। सेक्टर-28 सेक्टर में 42 सौ फ्लैट के निर्माण की योजना है, जबकि सेक्टर-20 में 32 सौ फ्लैट बनेंगे। सेक्टर और कॉलोनी के लोगों को सरकार का यह फैसला रास नहीं आ रहा है। दोनों सेक्टर के लोग इस फैसले का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि कॉलोनी के लोगों के लिए अलग से एक सेक्टर का निर्माण किया जाए। जहां उन्हें हर तरह की मूलभूत सुविधाएं प्रदान की जाएं। वहीं, कॉलोनी के लोगों का कहना है कि उन्हें फ्लैट नहीं चाहिए, बल्कि प्लॉट दिया जाए।
सेक्टर-28 के लोगों ने हाईकोर्ट में लगाई याचिका
सरकार के इस फैसले के खिलाफ सेक्टर-28 के निवासियों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। वहीं, इस केस में अब 10 दिसंबर को सुनवाई होगा। उधर, राजीव-इंदिरा कॉलोनी के लोग भी सरकार के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में जाने की तैयारी कर रहे हैं। अभी तक करीब सात सौ ज्यादा कॉलोनी के लोग कागजात पर हस्ताक्षर करके वार्ड पार्षद को सौंप चुके हैं। वार्ड नंबर-7 की पार्षद ऊषा रानी ने बताया कि वह इस मामले को लेकर हरियाणा विकास प्राधिकरण के मुख्यालय प्रशासक प्रदीप को ज्ञापन सौंप चुकी हैं।
लेकिन, सरकार उन्हें बेघर करने की योजना तैयार की जा रही है। यदि सरकार की योजना धरातल पर उतरती है तो कॉलोनी के लोग बेघर होने के साथ रोजी-रोटी के लिए भी मोहताज हो जाएंगे। उन्होंने बताया कि कॉलोनी के राजीव भुक्कल, संदीप बेदी, पन्ना लाल, नंदलाल, विजेंदर सिंह, कमल सिंह, सिपाही, भीम कुमार, रामानंद, रामशरण समेत कई लोग सरकार के फैसले का विरोध कर रहे हैं। उनकी मांग है कि उन्हें कॉलोनी में ही प्लॉट मुहैया करवाया जाए, क्योंकि फ्लैट में लोगों का गुजारा नहीं हो सकता है।
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