चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने फैसला एचआईवी पीड़ितों को सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) मोड के तहत रेडियोलॉजिकल जांच जैसी स्वास्थ्य सुविधाएं निशुल्क प्रदान करने का फैसला लिया है। इसके लिए एचआईवी पीड़ितों को राज्य की उन श्रेणियों में शामिल किया गया है, जिन्हें पीपीपी मोड के तहत विभिन्न स्वास्थ्य सुविधाएं निशुल्क प्रदान की जा रही हैं। राज्य में विभिन्न अस्पतालों में पीपीपी मोड के तहत चलाए जा रहे केंद्रों में अलग-अलग रेडियोलॉजिकल जांच की मौजूदा दरों के आधार पर लगभग 70 लाख रुपये प्रतिवर्ष प्रति मरीज का खर्च आएगा।
मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने इस आशय के एक प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी है। अब एचआईवी पीड़ित मरीजों को पीपीपी मोड के तहत सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध करवाई जा रही यूएसजी, सीटी स्कैन और एमआरआई सहित सभी प्रयोगशाला जांच एवं रेडियोलॉजिकल जांच की सुविधा भी निशुल्क उपलब्ध करवाई जाएगी। इससे पहले, उनको इसके लिए राशि चुकानी पड़ती थी।
वर्तमान में प्रदेश में एचआईवी से पीड़ित लगभग 22 हजार मरीज एंटीरिट्रोवायरल थैरेपी (एआरटी) ले रहे हैं। इसके अतिरिक्त, इनमें लगभग 300 मरीज प्रति माह बढ़ रहे हैं। एआरटी सेंटर, पीजीआईएमएस रोहतक के अनुसार ऐसे कुल मरीजों में से लगभग 2 से 3 प्रतिशत एचआईवी पीड़ितों को ही रेडियोलॉजिकल जांच की आवश्यकता पड़ती है। इस प्रकार, वार्षिक आधार पर एचआईवी पीड़ितों के प्रबंधन के दौरान लगभग 700 से 800 एचआईवी पीड़ितों को रेडियोलॉजिकल जांच की आवश्यकता पड़ेगी। पीपीपी मोड के तहत इन सात श्रेणियों को निशुल्क स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करने के लिए सरकार ने 45 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया है।
इन श्रेणियों को मिलता है लाभ
पीपीपी मोड के तहत विभिन्न स्वास्थ्य सुविधाएं निशुल्क प्राप्त करने वाली सात श्रेणियों में राज्य के बीपीएल एवं शहरी मलीन बस्तियों के मरीज, राज्य सरकार से निशक्तता भत्ता प्राप्त कर रहे मरीज, किसी भी निशुल्क श्रेणी में नहीं आने वाले मरीज, अनुसूचित जाति श्रेणी के मरीज, हरियाणा सरकार की आरक्षण नीति के अनुसार आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के मरीज, सड़क दुर्घटना के शिकार लावारिस व्यक्ति और राज्य सरकार के कर्मचारी, पेंशनभोगी और उनके आश्रित शामिल हैं। एचआईवी पीड़ित मरीजों को इसमें आठवीं श्रेणी के रूप में शामिल किया गया है।