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पंजाब सरकार ने बासमती पर मंडी और ग्रामीण विकास फीस एक फीसदी घटाई

Tue, 22 Sep 2020 09:57 PM IST
पंचकुला ब्‍यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

  • मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने की घोषणा, अभी तक दो फीसदी लगती थी फीस
  • बोले- पंजाब की बासमती को अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में रखने में सहायक होगा निर्णय
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कैप्टन अमरिंदर सिंह (फाइल फोटो) - फोटो : @capt_amarinder
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विस्तार
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पंजाब में नए कृषि विधेयकों के बीच पंजाब और बाहर के बासमती व्यापारियों और मिलरों को समान अवसर प्रदान करने के लिए रास्ता साफ हो गया है। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने मंगलवार को मंडी विकास फीस (एमडीएफ) और ग्रामीण विकास फीस (आरडीएफ) की दरें 2 से घटाकर 1 प्रतिशत करने की घोषणा की है।

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मुख्यमंत्री का कहना है कि सरकार के इस निर्णय से अंतरराष्ट्रीय बाजार में पंजाब की बासमती को मुकाबले में रखने में सहायता मिलेगी। इसके साथ ही राज्य सरकार बासमती व्यापारियों और मिलरों को 100 करोड़ रुपये की राहत भी मुहैया करवाएगी। यह बदलाव इस शर्त पर है कि राज्य से बासमती धान की फसल, चावल अन्य मुल्कों में निर्यात करने के लिए किसी भी धान, चावल डीलर, मिल मालिक, व्यापारी को किसी फीस की वापसी की इजाजत नहीं दी जाएगी। 

मुख्यमंत्री ने यह एलान पंजाब मंडी बोर्ड के प्रस्ताव पर गौर करते हुए किया। मंडी बोर्ड ने यह प्रस्ताव पंजाब राइस मिलर्स और निर्यातक एसोसिएशन तथा पंजाब बासमती राइस मिलर्स एंड एक्सपोर्ट्स एसोसिएशन से मिले आवेदनों की विस्तार से जांच पड़ताल करने के बाद तैयार किया।

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तीन राज्यों में माफ है फीस

पंजाब राइस मिलर्स एंड एक्सपोर्ट्स एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री से कहा था कि कृषि विधेयक लागू हो रहे हैं। बासमती का उत्पादन करने वाले राज्यों के बीच फीस और अन्य दरों में लगभग 4 प्रतिशत का अंतर पैदा हो जाएगा। हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश में चावल निर्यातकों के साथ वह मुकाबला नहीं कर सकेंगे, जिन्होंने कृषि उत्पाद पर मंडी फीस से पूरी तरह मुक्त किया हुआ है।

पंजाब में कस्टम मिलिंग नीति में संशोधन, मिलों में बनाया जाएगा मंडी यार्ड
धान खरीद को लेकर पंजाब सरकार ने कस्टम मिलिंग नीति 2020-21 में संशोधन किया है। संशोधन के तहत अब मिलों के स्थानों का मंडी यार्ड के रूप में प्रयोग किया जाएगा, जहां धान की खरीद की जाएगी। संक्रमण के बीच सरकार के इस निर्णय से मंडी में भीड़ नहीं लग पाएगी। मुख्यमंत्री की तरफ से इस मकसद के लिए कस्टम मिलिंग नीति 2020-21 के क्लॉज 12 (जे) को हटाने को मंजूरी दे दी गई है।

मुख्यमंत्री की तरफ से खरीफ की फसल 2020-21 की कस्टम मिलिंग नीति और उपबंधों में कुछ और संशोधन भी किए गए हैं। इसमें बैंक गारंटी क्लॉज की बहाली, आरओ की अधिकतम बांटे जाने वाली इजाजत योग्य संख्या और मौजूदा मिलों की बिक्री शामिल है। एक सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि साल 2020-21 की कस्टम मिलिंग नीति में शामिल बैंक गारंटी क्लॉज की बहाली को बीते वर्ष के उपबंधों की तुलना में हरी झंडी दिए जाने से बैंकों में जमा करवाई जाने वाली रकम की फीसद मौजूदा 10 प्रतिशत से कम करके 5 तक आ जाएगी। इससे राज्य के खजाने पर कोई अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा, क्योंकि बैंक गारंटी बराबर के पैमाने के तौर पर काम करेगी।

संशोधित नियमों के अंतर्गत मिल मालिक को अब अपने स्थान में धान का वास्तविक भंडारण करने से संबंधित एजेंसी को बैंक गारंटी जमा करवानी पड़ेगी जोकि 5000 मीट्रिक टन से अधिक हद तक बांटे जाने वाले मुफ्त धान को हासिल करने की कीमत के 5 प्रतिशत के बराबर होगी। यह बैंक गारंटी एफसीआई को जरूरी चावल उपलब्ध करवा दिए जाने के बाद छोड़ दी जाएगी।

स्वामित्व बदलाव पर नई मिल का होगा पंजीकरण
प्रवक्ता ने बताया कि मुख्यमंत्री ने कस्टम मिलिंग नीति 2020 -21 के क्लॉज 10 (बी) (आई) (8) में संशोधन को भी मंजूरी दे दी है, जो कि इस हद तक होगी कि स्वामित्व, साझेदारी में 50 प्रतिशत से अधिक बदलाव होने की सूरत में इसको रजिस्ट्रेशन के पक्ष से एक नई मिल समझा जाएगा। अधिकतम बांटे जाने योग्य धान के ऐच्छिक हक में कोई कटौती नहीं होगी बशर्ते कि मौजूदा नीति के अनुसार नई मिल स्थापित करने के लिए सभी शर्तें पूरी की हों।
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