चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने डिफाल्ट जमानत से जुड़ी एक याचिका का निपटारा करते हुए कहा कि पब्लिक प्रोसीक्यूटर कोई पोस्ट ऑफिस नहीं है जो डिफाल्ट जमानत का विरोध करने वाली जांच एजेंसी के आवेदन को यूं ही आगे बढ़ा दे। उसे दिमाग का इस्तेमाल करते हुए कानून के अनुरूप तर्क सहित आगे बढ़ाना चाहिए।
मामला सिरसा का है जहां पर पुलिस ने 7 जनवरी 2021 को सूचना के आधार पर जोगिंदर सिंह को नशे की खेप के साथ पकड़ा था। इस मामले में पुलिस निश्चित समय में चालान पेश नहीं कर सकी और जोगिंदर सिंह ने डिफाल्ट जमानत के लिए याचिका दाखिल कर दी। इस दौरान जांच एजेंसी ने जांच पूरी करने के लिए निश्चित 180 दिन की अवधि को बढ़ाने के लिए आवेदन दे दिया। ट्रायल कोर्ट ने याची की डिफाल्ट जमानत की अर्जी को खारिज करते हुए जांच पूरी करने की तय अवधि को बढ़ा दिया। इसके खिलाफ याची ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। हाईकोर्ट ने कहा कि इस मामले में पब्लिक प्रोसीक्यूटर ने जांच एजेंसी के आवेदन को पढ़ा तक नहीं और अपने हस्ताक्षर कर आगे बढ़ा दिया। अवधि बढ़ाने के आवेदन के साथ ठोस कारण, अभी तक की जांच की स्थिति आदि को देखते हुए प्रोसीक्यूटर को अपने दिमाग का इस्तेमाल करते हुए आगे बढ़ाना चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि इससे आरोपी के अधिकारों का हनन होता है। इस टिप्पणी केसाथ ही हाईकोर्ट ने याची को डिफाल्ट जमानत का लाभ दे दिया।