चंडीगढ़। सब्सिडी वाली बिजली के कारण घाटा झेल रहे पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड (पीएसपीसीएल) ने आमदनी के नए रास्ते तलाशने शुरू कर दिए हैं। इस कड़ी में निगम ने केबल टीवी नेटवर्क, केबल टीवी ऑपरेटर और ब्राडबैंड सर्विस प्रोवाइडरों द्वारा खंभों के इस्तेमाल के लिए किराए में 5 फीसदी का इजाफा कर दिया है।
निगम के सूत्रों से यह जानकारी भी मिली है कि राज्य में घरेलू उपभोक्ताओं को सस्ती अथवा मुफ्त बिजली उपलब्ध कराते समय निगम की ओर से मकानों में प्रत्येक मंजिल के लिए अलग मीटर की व्यवस्था करने पर भी विचार किया जा रहा है, जिससे मीटर भाड़े सहित विभिन्न प्रकार से कर व उपकर से आमदनी बढ़ सके।
इस बीच, भीषण गर्मी के कारण बिजली की बढ़ती मांग और घटते उत्पादन के मद्देनजर पीएसपीसीएल ने बिजली खरीदने के लिए अल्पावधि लोन लेने का फैसला किया है। हालांकि पीएसपीसीएल द्वारा विभिन्न मदों के लिए बैंकों से लोन लिया जाता रहा है लेकिन यह पहला अवसर है जब निगम बिजली खरीदने के लिए लोन लेने जा रहा है। निगम में एक साल के लिए 500 करोड़ रुपये का लोन लेने के लिए 22 बैंकों व वित्त एजेंसियों से कोटेशन मंगा लिए हैं। पीएसपीसीएल की शर्त के अनुसार, इस लोन का भुगतान मोराटोरियम अवधि के बाद 6 समान मासिक किस्तों में किया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए पीएसपीसीएल को बिजली खरीदनी पड़ती है। मौजूदा गेहूं खरीद मौसम के तुरंत बाद राज्य में धान की बुआई का सीजन शुरू होने वाला है, जिसके लिए निगम को 15000 मेगावाट तक बढ़ चुकी बिजली की जरूरत को पूरा करना होगा। बिजली खरीदने के लिए लोन के फैसले में भी एक पेंच यह है कि अगर इसका भुगतान समय पर नहीं हो सका तो निगम को पीक सीजन में सेंट्रल पूल से समय पर बिजली नहीं मिल सकेगी। फिर भी, सब कुछ ठीक रहा तो इस बार पीक सीजन में निगम को सेंट्रल पूल से 12 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली मिल सकेगी।
केबल ऑपरेटरों के लिए खंभों का किराया बढ़ाया
पीएसपीसीएल ने केबल टीवी नेटवर्क, केबल टीवी ऑपरेटरों और ब्राडबैंड सेवा प्रदाताओं को खंभे किराए पर देने की कीमत में पिछले साल के मुकाबले 5 फीसदी का इजाफा कर दिया है। नई दरें गत 1 अप्रैल से लागू हो गई हैं। माना जा रहा है कि इस बढ़ोतरी से पीएसपीसीएल को तो लाभ होगा लेकिन केबल नेटवर्क ऑपरेटर अपनी सेवाओं के दाम बढ़ाकर इसे उपभोक्ताओं पर डाल सकते हैं। खंभों के नए किराए के अनुसार, 50 हजार तक खंभों के इस्तेमाल पर कंपनियों को 230 रुपये के बजाय 240 रुपये प्रति खंभा प्रति वर्ष देने होंगे, जबकि 50 हजार से 1 लाख खंभों के लिए 215 के बजाय 225 रुपये और एक लाख से अधिक खंभों के इस्तेमाल के लिए 205 के बजाय 215 रुपये प्रति खंभा प्रति वर्ष किराया वसूला जाएगा।