पंचकूला। 300 बेड के मदर एंड चाइल्ड हॉस्पिटल में गायनी और पीडियाट्रिक ओपीडी समेत इनके वार्ड शिफ्ट हो चुके हैं, लेकिन स्टाफ की कमी के चलते वार्डों का संचालन पूरी तरह शुरू नहीं हो सका है। स्टाफ की कमी पूरी करने के लिए स्वास्थ्य महानिदेशक कार्यालय को भेजा गया प्रस्ताव कई महीने बाद भी अटका पड़ा है। ऐसे में सिविल अस्पताल में लेबर वार्ड, निक्कू वार्ड के अलावा एमसीएच में डॉक्टरों पर मरीजों का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। पीएमओ ऑफिस की तरफ से एमसीएच में वार्डों की शिफ्टिंग को लेकर स्वास्थ्य महानिदेशक कार्यालय को रिमाइंडर भी भेजा गया, मगर अब तक प्रस्ताव को मंजूरी नहीं मिल पाई है।
नॉर्म्स के हिसाब से चाहिए 35 विशेषज्ञ और 117 सफाईकर्मी
जानकारी के अनुसार अस्पताल प्रशासन की तरफ से डीएचएस को दो बार प्रस्ताव भेजे गए हैं। नॉर्म्स के मुताबिक 300 बेड अस्पताल में 35 मेडिकल स्पेशलिस्ट, गायनी में 15 विशेषज्ञ, पीडियाट्रिक में 12, एनेस्थिसिया में 6, रेडियोलॉजिस्ट 2, क्लिनिकल स्पेशलिस्ट, सीनियर मैट्रन 1, असिस्टेंट मैट्रन और सीनियर नर्सिंग ऑफिसर 7 व अन्य स्टाफ होना जरूरी है।
एचआरएन के तहत आउटसोर्स किए जाने वाले कर्मचारियों में 117 स्वीपर, 117 वार्डन, 35 सिक्योरिटी गार्ड, 4 माली, 6 लॉन्ड्री, 4 सुपरवाइजर, 3 इलेक्ट्रीशियन, 5 इलेक्ट्रिकल हेल्पर, 1 प्लंबर, 2 सीवरमैन और 1 कार्पेंटर अनिवार्य हैं। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार एमसीएच में मौजूदा सिविल अस्पताल का काम देख रहे कर्मचारी ड्यूटी बांटकर काम कर रहे हैं। अगर स्टाफ की कमी यूं ही बनी रही तो मरीजों के इलाज में देरी होना संभव है।
मौजूदा स्टाफ से चल रहा काम
गायनी विभाग में 3 रेगुलर मेडिकल ऑफिसर डॉ. कल्पना त्यागी, डॉ. राजदीप कौर और डॉ. अनुज यादव, 2 कंसल्टेंट डॉ. वंदना गुप्ता और नीरज कपूर हैं। मरीजों के दबाव को देखते हुए 22 डीएनबी रेजिडेंट डॉक्टर गायनी वार्ड में तैनात हैं।
बाल रोग विभाग में 1 एसएमओ डॉ. सुरेश कांशल, 3 रेगुलर मेडिकल ऑफिसर डॉ. गगन सिंगला, डॉ. श्रुति सरीन और डॉ. अशोक हैं, साथ ही 5 डीएनबी रेजिडेंट डॉक्टर लगाए गए हैं। खून जांच और सैंपलिंग के लिए 19 रेगुलर और 17 कांट्रैक्चुअल लैब टेक्निशियन तैनात हैं, जो एमसीएच के साथ सिविल अस्पताल के विभिन्न वार्डों में ड्यूटी कर रहे हैं।