पंचकूला। एक साल पहले हर घर में नल से जल पहुंचाने वाला पंचकूला कागजों में प्रदेश का पहला जिला अवश्य बन गया है, लेकिन पिंजौर का एक गांव आज भी पांडव कालीन बावड़ियों पर निर्भर है। जिला मुख्यालय से 25 किलोमीटर दूर गांव धामसू में चार में से तीन बावड़ियां सूख चुकी हैं, एक बावड़ी पर करीब 300 लोग आश्रित हैं। गांव के पशु भी इसी बावड़ी पर निर्भर हैं। गर्मी की शुरूआत में ही इस बावड़ी का जलस्तर भी 2.5 फीट नीचे चला गया है। वर्तमान में ग्रामीण लोटा-लोटा पानी निकालकर अपनी बाल्टी भरते हैं। इसके लिए भी लोग घंटों लाइन में खड़े रहते हैं। लोगों को चिंता है कि मई, जून की गर्मी में पानी की समस्या का कैसे समाधान करेंगे। इस गांव में सरकार का खुले में शौच मुक्त और हर घर में नल से जल योजना दम तोड़ती नजर आती है। सरकार ने जिले के हर घर में नल से जल पहुंचाने का दावा कर लिया है लेकिन इस योजना की पाइप लाइन ही गांव से ढाई किलोमीटर दूर है। अधिकारी कहते हैं कि अप्रैल में गांव तक पाइप लाइन पहुंच जाएगी।
लक्ष्य पूरा, मिशन अधूरा
खुले में शौच मुक्त का लक्ष्य जिला प्रशासन ने बेशक पूरा कर लिया है, लेकिन पिंजौर के धामसू गांव में गर्मी के दिनों में खुले में शौचमुक्त का मिशन दम तोड़ देता है। गांव में पीने के लिए पानी नहीं है। लोगों के अनुसार अभी गर्मी की शुरुआत हुई है, ऐसी स्थिति में लोग अपनी प्यास बुझाएं, डंगरों (जानवरों) को पानी पिलाएं या फिर शौचालय में इस्तेमाल करें। गांव में एक बावड़ी के अलावा पानी का कोई दूसरा स्रोत नहीं है। ढाई फीट भरे बावड़ी के पानी से नहाना, कपड़े धोना और प्यास बुझाना इतना करने में ही लोगों की हालत खराब हो जाती है। शौचालय के इस्तेमाल में तो पानी ज्यादा चाहिए।
भगवान भरोसे जिंदगी: बस की सुविधा ना ही स्वास्थ्य केंद्र की
धामसू निवासी कृष्ण कुमार ने बताया कि गांव में कोई बीमार पड़ जाए तो उसके उपचार के लिए न तो यहां कोई प्राइमरी हेल्थ सेंटर है और ना ही दवाखाना। इतना ही नहीं गांव में मोबाइल नेटवर्क भी नहीं है। ताकि बीमार पड़ने पर एंबुलेंस शहर से गांव तक एंबुलेंस बुलाई जा सके। गांव से शहर के लिए रोडवेज बस की भी सुविधा नहीं है। जिसके चलते यहां के लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। गांव के लोग खुद के साधन से ही शहर पहुंच सकते हैं।
पिछले कई सालों से गांवों में पेयजल का संकट है। चार में से तीन बावड़ियां सूख चुकी हैं। केवल एक बावड़ी पर पूरा गांव आश्रित है। गर्मी के दिनों में पानी के अभाव में ग्रामीणों का बुरा हाल हो जाता है। -बाबूराम, निवासी धामसू।
पिछले 40 साल से गांव की बावड़ी से पानी भर रही हूं। पहले यहां की बावड़ियों में पानी ज्यादा होता था, तो गांव के लोगों को परेशानी नहीं होती थी, लेकिन अब तो बावड़ियां सूखने लगी हैं। ऐसे में गर्मी के दिनों में लोगों का बुरा हाल हो जाता है। - हरदेवी, निवासी धामसू
19 साल से पानी के लिए गांव में स्थित बावड़ी पर आना पड़ता है। यहां पानी के लिए एक बावड़ी ही स्रोत है। अप्रैल, मई और जून माह में बावड़ी की जलस्तर बिल्कुल नीचे चला जाता है। लोटा या फिर छोटे बर्तनों से थोड़ा-थोड़ा पानी बावड़ी से निकालना पड़ता है। - फूलमती, निवासी धामसू।
इस समय गांव में एक बावड़ी से 250 से 300 लोगों की प्यास बुझ रही है। गर्मी में बावड़ी के पानी का स्तर नीचे चला जाता है। अप्रैल से जून तक यहां सुबह से शाम तक लोग पानी के लिए लाइनों में खड़े रहते हैं। उसके बाद पीने के लिए पानी नसीब होता है। - बासदेव, निवासी धामसू।
गांव की बावड़ियां सूखने लगी हैं, जिसके चलते नहाना और कपड़ा धोना तो दूर गर्मी में लोगों को पेयजल के लिए तरसना पड़ता है। मेरा इस गांव में ससुराल है, यहां अक्सर आना-जाना होता है। अगर समय रहते यहां पाइप लाइन नहीं बिछाई गई तो अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे। यज्ञदत्त शर्मा, एडवोकेट पंचकूला।
डेढ़ साल के प्रयास के बाद टिब्बी तक पाइप लाइन बिछवा दिया गया है, अब धामसू तक पेयजल उपलब्ध कराने के लिए पाइप लाइन करीब ढाई किलोमीटर तक बिछाया जाना है। इसका टेंडर अलॉट हो चुका है। अप्रैल से मई तक इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू हो जाएगा। - भाग सिंह दमदमा, पूर्व जिला पार्षद एवं जिला जजपा अध्यक्ष पंचकूला।
तीन साल संघर्ष करके टिब्बी तक पाइप लाइन बिछवाया है। टेंडर अलॉट हो गया है। टिब्बी से धामसू के लिए अप्रैल में पाइप लाइन बिछाने का काम शुरू हो जाएगा। - राजिंदर पूर्व सरपंच, मल्ला पंचायत।
20 लाख रुपये की लागत से धामसू गांव में ढाई किलोमीटर पाइप लाइन बिछाने के लिए टेंडर अलॉट कर दिया गया है। अभी जो पाइप लाइन बिछाया जाना है, वह मार्केट में उपलब्ध नहीं है। पाइप मिलते ही प्रोजेक्ट का काम शुरू कर दिया जाएगा। - विकास लाठर, एक्सईएन पब्लिक हेल्थ पंचकूला।
यह था दावा : हर घर में नल से जल पहुंचाने वाला प्रदेश का पहला जिला बना पंचकूला
हरियाणा विधानसभा स्पीकर ने फरवरी 2021 में दावा किया था कि हर घर में नल से जल पहुंचाने और घर के प्रत्येक व्यक्ति को कम से कम 55 लीटर पानी उपलब्ध करवाने वाला पंचकूला प्रदेश का पहला जिला बन गया है। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना जल जीवन मिशन के तहत जिले के प्रत्येक गांव में अब नल से जल की आपूर्ति हो रही है। 2022 तक इस लक्ष्य को पूरा करने का संकल्प लिया गया है, लेकिन, पंचकूला ने यह लक्ष्य-2021 में ही हासिल कर लिया है। पंचकूला की सभी 128 ग्राम पंचायतों के कुल 33 हजार 108 घरों में पानी के कनेक्शन उपलब्ध करवा दिए गए हैं। इसके लिए जल जीवन मिशन और जन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी और कर्मचारी विशेष रूप से बधाई के पात्र हैं। इस पूरे प्रोजेक्ट पर 20 करोड़ रुपये की राशि खर्च की गई है। योजना के अंतर्गत हर घर में कम से कम 55 लीटर प्रति व्यक्ति के हिसाब से पानी उपलब्ध करवाने के लक्ष्य को हासिल कर लिया गया है। इसके अलावा 77 हजार मीटर लंबी पुरानी पाइप लाइनों की बदलने का काम चल रहा है।