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सालाना नौ-दस फीसदी फीस ही बढ़ा सकेंगे निजी स्कूल

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चंडीगढ़। हरियाणा में निजी स्कूल अब हर साल मनमाने तरीके से फीस नहीं बढ़ा सकेंगे। स्कूल उपभोक्ता मूल्य सूचकांक को जोड़कर सालाना नौ-दस प्रतिशत फीस ही बढ़ा सकेंगे। प्रदेश सरकार ने फीस वृद्धि के नाम पर मुनाफाखोरी रोकने के लिए हरियाणा स्कूल शिक्षा नियम-2003 में संशोधन किया है।
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अधिसूचना वीरवार देर शाम स्कूल शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. महावीर सिंह ने जारी कर दी है। इसके अनुसार साल में पहली से आठवीं तक के बच्चों से 12 हजार व नौवीं-12वीं के बच्चों से 15 हजार रुपये फीस वसूलने वाले स्कूलों पर नए नियम लागू नहीं होंगे। प्रदेश में करीब 15 हजार निजी स्कूल हैं। अगर वे अच्छी सुविधाएं बच्चों को दे रहे हैं और तकनीक में इजाफा करते हैं तो दस प्रतिशत से अधिक फीस सालाना बढ़ा सकेंगे। स्कूल किसी मद में वृद्धि कर अभिभावकों से पैसा वसूल नहीं कर पाएंगे। पांच साल तक एक ही वर्दी रहेगी। किताबें, जूते व अन्य सामग्री खरीदने के लिए स्कूल उनकी मर्जी क दुकान से खरीदने का दबाव नहीं बना सकेंगे।
नए नियमों के अनुसार स्कूल किसी बच्चे से एक लाख रुपये तक वार्षिक फीस लेता है तो उसे नौ-दस हजार रुपये की वृद्धि का ही अधिकार होगा। इससे ज्यादा फीस लेने पर स्कूल संचालकों के खिलाफ विभाग कानूनी कार्रवाई करेगा। पांच साल बाद इन नियमों की समीक्षा की जाएगी।
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स्कूल फीस : नियमों के उल्लंघन पर जुर्माने का प्रावधान
हरियाणा स्कूल शिक्षा नियम-2003 में संशोधन के बाद सरकार ने नियमों के पहली बार उल्लंघन पर तीस हजार प्राइमरी तक के स्कूलों, 50 हजार रुपये मिडिल व 1 लाख रुपये 12वीं तक के स्कूलों के लिए जुर्माने का प्रावधान किया है। दूसरी बार उल्लंघन करने पर यह राशि दोगुना हो जाएगी। तीसरी वापस अवहेलना पर निदेशक से मान्यता वापस लेने की सिफारिश मंडलायुक्त की समितियां करेंगी।
तीन महीने के भीतर स्कूल को सुनवाई का मौका दिया जाएगा। जवाब से संतुष्ट न होने पर मान्यता रदद कर दी जाएगी। बच्चों से ली गई ज्यादा फीस स्कूल को वापस करनी होगी। निदेशक के फैसले के विरुद्घ विभाग के प्रधान सचिव, अतिरिक्त मुख्य सचिव को शिकायत कर सकते हैं। प्रदेश के निजी स्कूलों में 55 फीसदी से अधिक इस तरह के हैं जो विद्यार्थियों से हर साल मनमानी फीस वसूलते हैं। निसा के राष्ट्रीय अध्यक्ष कुलभूषण शर्मा ने इसका स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि बजट स्कूलों को इससे लाभ होगा। सरकार ने उनकी मांगों को मानते हुए नियमों में संशोधन किया है।
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नए नियमों में ये भी प्रावधान
- फीस नकद राशि के तौर पर नहीं ली जाएगी। चेक, डीडी या डिजिटल मोड से लेनी होगी।
- फीस को मासिक, द्विमासिक या तिमाही में लेना होगा। छह मा या वार्षिक आधार पर फीस नहीं ले सकेंगे।
- पहली, छठी, नौवीं या 11वीं में नए दाखिला पर ही फीस लेंगे
- बोर्ड परीक्षा के लिए भुगतान योग्य फीस ली जाएगी
- परिवहन, बोर्डिंग, भोजन, अध्ययन व भ्रमण की मनमानी फीस नहीं ले सकते
- स्कूल छोड़ने पर सिक्योरिटी राशि लौटानी होगी
- सत्र के बीच में फीस नहीं बढ़ाई जाएगी
- फीस वृद्धि का ब्योरा फार्म-6 में देकर स्कूल के नोटिस बोर्ड पर प्रदर्शित करना होगा
- स्कूल संचालक फरवरी में निदेशक को फीस वृद्धि की जानकारी देंगे, न देने वाले स्कूलों को फीस वृद्घि से रोक दिया जाएगा
- फीस वृद्धि की जांच और शिकायतों के निवारण के लिए मंडलायुक्त की अध्यक्षता में समिति गठित होगी
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