पंचकूला। सेक्टर-26 स्थित पॉलिटेक्निक कॉलेज में हॉस्टल की सुविधा नहीं मिलने पर दूर-दराज जिलों से पढ़ने आने वाली छात्राओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। आवेदन करने के बावजूद हॉस्टल की सुविधा नहीं मिलने के कारण छात्राओं की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है। डीएमएलटी और आर्किटेक्चर विंग की छात्राओं का कहना है कि दिल्ली, करनाल, हिसार, यमुनानगर से रोजाना पंचकूला सेक्टर-26 आ पाना संभव नहीं है। जैसे-तैसे पंचकूला बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन तक पहुंचते भी हैं तो सेक्टर-26 पॉलिटेक्निक तक वाहन इत्यादि की कोई व्यवस्था नहीं होने के कारण परेशानी बढ़ जाती है।
घंटों वाहन का इंतजार करना पड़ता है जो कॉलेज तक पहुंचा दे। छात्राओं का कहना है कि डेढ़ साल से रास्ता ही नाप रहे हैं। कॉलेज से घर पहुंचते-पहुंचते थकान इतनी हो जाती है कि पढ़ाई तो पल्ले ही नहीं पड़ती। उन्होंने कॉलेज में गर्ल्स हॉस्टल की सुविधा देखकर दाखिला लिया था। इनका कहना है कि तीसरा सेमेस्टर के बाद भी इसका लाभ नहीं मिल पाया है। केंद्र सरकार के ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ के नारे पर पीडब्ल्यूडी की अफसरशाही हावी हो गए हैं। पीडब्ल्यूडी ने पॉलिटेक्निक कॉलेज प्रबंधन को हॉस्टल की बिल्डिंग नहीं सौंपी है।
बिल्डिंग हैंड ओवर नहीं किया
सेक्टर-26 पॉलिटेक्निक कॉलेज में छात्राओं के रहने के लिए यहां एक साल पहले हॉस्टल की बिल्डिंग तैयार की गई थी, लेकिन कॉलेज प्रबंधन को अब तक पीडब्ल्यूडी ने हॉस्टल की बिल्डिंग हैंड ओवर नहीं है। इसके लिए कॉलेज प्रबंधन करीब दस बार पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों के साथ पत्राचार कर चुका है। हॉस्टल की बिल्डिंग नहीं मिलने के चलते दिल्ली, करनाल, हिसार, की छात्राएं रोजाना क्लास अटेंड नहीं कर पा रही हैं। नतीजा उनको पहले साल जुलाई 2020 परीक्षा का रिजल्ट महज 14.86 फीसदी और जनवरी मार्च 2021 में 40.40 फीसदी रहा। इसका खुलासा पंचकूला पैरेंट्स एसोसिएशन के प्रधान मनीष बांगण की तरफ से मांगे आरटीआई में हुआ है।
फर्नीचर भी नहीं लगाया, लिफ्ट भी तैयार नहीं
पॉलिटेक्निक कॉलेज में लड़कियों के लिए बनाए हॉस्टल के 30 कमरों में अभी तक फर्नीचर नहीं लगा है। लिफ्ट का भी काम अभी तक पूरा नहीं किया गया है। साथ इनमें गीजर, वाटर कूलर व कुर्सियों की भी व्यवस्था अभी तक नहीं हो पाई है। हॉस्टल के लिए कॉलेज प्रबंधन के पास दिल्ली, करनाल, हिसार, यमुनानगर व राजस्थान व अंबाला की छात्राओं ने आवेदन किया है।
क्या कहती हैं छात्राएं
आर्किटेक्चर की द्वितीय वर्ष की छात्रा हूं। यमुनानगर से रोजाना पढ़ाई के लिए सेक्टर-26 के पॉलिटेक्निक आना पड़ता है। रोजाना यहां तक आने और जाने में 240 रुपये लगते हैं। साथ ही घर पहुंचते-पहुंचते थकान हो जाती है, हॉस्टल के लिए आवेदन भी कर चुकी हूं। जल्दी हॉस्टल खुल जाता तो सारी परेशानी दूर हो जाती। - आभा, छात्रा।
हॉस्टल की सुविधा देखकर पंचकूला पॉलिटेक्निक कॉलेज में दाखिला लिया था। डीएमएलटी द्वितीय वर्ष की छात्रा हूं। हिसार से रोजाना पंचकूला आना और जाना संभव नहीं है। दूसरों के घर पर कब तक रहूं। हॉस्टल की सुविधा कॉलेज कैंपस में जल्दी मिल जाती तो पढ़ाई में फोकस कर पाते। हॉस्टल के लिए आवेदन भी कर चुकी हूं। - नीशू, छात्रा।
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर की रहने वाली हूं। पॉलिटेक्निक कॉलेज में आर्किटेक्चर द्वितीय वर्ष की छात्रा हूं। हॉस्टल की सुविधा नहीं मिलने की वजह से काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हॉस्टल की सुविधा देखकर ही यहां दाखिला लिया था कि कॉलेज कैंपस में ही पढ़ाई और रहने की सुविधा मिलेगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। हॉस्टल के लिए आवेदन कर चुकी हूं, सुविधा कब तक मिलेगी, पता नहीं। - निशा सिंह, छात्रा।
चंडीगढ़ सेक्टर एक से रोजाना पंचकूला पॉलिटेक्निक कॉलेज में कक्षाएं लगाने के लिए आती हूं। हॉस्टल जल्दी खुलता तो इस सुविधा का लाभ मेरे अलावा दिल्ली, करनाल, यमुनानगर से आने वाली छात्राओं को भी मिलता, जो इस समय हॉस्टल नहीं खुलने की वजह से रोजाना कक्षाएं नहीं लगा पा रही हैं, क्योंकि रोजाना दिल्ली, हिसार व करनाल से आना और जाना संभव नहीं है। - अन्नया, छात्र।
कॉलेज में लड़कियों के लिए हॉस्टल बनाया गया है। अब तक कई छात्राएं हॉस्टल की सुविधा के लिए आवेदन कर चुकी हैं, लेकिन अभी तक पीडब्ल्यूडी ने हॉस्टल की बिल्डिंग को कॉलेज प्रबंधन को हैंडओवर नहीं किया है। इसके लिए करीब दस बार पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों को पत्र लिख चुका हूं। - दलजीत सिंह, प्रिंसिपल, पॉलिटेक्निक कॉलेज पंचकूला
अभी हाल ही में चार्ज संभाला है। मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। हॉस्टल की बिल्डिंग कॉलेज प्रबंधन को हैंडओवर क्यों नहीं की गई। चेक करवाता हूं। हॉस्टल में जो काम अधूरा रह गया है, उसे पूरा कर जल्द हॉस्टल कॉलेज प्रबंधन को हैंडओवर कर दिया जाएगा। - गौरव जैन, एक्सईएन पीडब्ल्यूडी पंचकूला।