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पंचकूला के विकास में सियासत का रोड़ा, नेताओं ने फिर एक दूसरे पर मढ़े आरोप

Fri, 23 Jun 2017 01:47 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पंचकूला
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ज्ञानचंद गुप्ता को हाईकोर्ट से नोटिस - फोटो : File Photo
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पंचकूला में विकास पर सियासत ऐसा रोड़ा बनी है कि यहां की जनता परेशान हो गई है। लोग समझ नहीं पा रहे हैं कि ये हो क्या रहा है।नेताओं का यह नाटक कब खत्म होगा यह तो कोई नहीं जानता। लेकिन कुछ लोग इसे घटिया राजनीति की संज्ञा दे रहे हैं।
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यह ऐसी राजनीति है जिस कारण पंचकूला का विकास ठप हो गया है। पिछले एक साल में नगर निगम में अधिकारियों और मेयर के बीच खींचतान और आरोप प्रत्यारोप ने शहरवासियों के लिए मुश्किलें बढ़ा दी हैं। हालांकि इस सियासत के पीछे विधायक ज्ञानचंद गुप्ता पर कांग्रेस साजिश रचने और पर्दे के पीछे गेम खेलने के आरोप लगा रही है। वहीं बीजेपी का कहना है कि मेयर काम ही नहीं करना चाहतीं हैं। हालांकि रुपयों की कमी नहीं है, करोड़ों का बजट है। लेकिन कोई काम न करने देने का आरोप लगा रहा है तो कोई काम की इच्छा न होने का आरोप। स्मार्ट सिटी और स्वच्छता मिशन में पिछड़ने के बाद भी विकास को तरजीह देने के बजाय सभी अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने में जुटे हैं। अब कौन काम नहीं करने दे रहा है, यह जनता बेहतर जानती है। फिलहाल पंचकूला में सफाई व्यवस्था, स्ट्रे डॉग्स की समस्या, सीवरेज, बेसहारा पशु, पॉलीथीन से अटा शहर, बारिश से पहले की अधूरी तैयारी के साथ बदहाल सड़कें इस बात की गवाह हैं कि शहरवासी निगम की बेफिक्री और राजनीति का किस तरह शिकार हुए हैं।

विकास के लिए पैसा नहीं इच्छा शक्ति चाहिए : विधायक
पंचकूला के विधायक ज्ञानचंद गुप्ता ने कहा कि गलियों की सफाई, स्ट्रे डॉग्स की समस्या, बेसहारा पशु, पॉलिथीन, अतिक्रमण की समस्या दूर करने के लिए पैसा नहीं इच्छा शक्ति चाहिए। उन्होंने मेयर पर आरोप लगाते हुए कहा कि पिछले वर्षों के दौरान विकास कार्यों में पंचकूला काफी पीछे रह गया है। क्योंकि इसकी पहल नहीं की गई। विजन की कमी के कारण पंचकूला का यह हश्र हो रहा है। स्मार्ट सिटी, स्वच्छता सर्वेक्षण में पिछड़ने की वजह भी नगर निगम की कार्यशैली और वहां का माहौल है। विधायक ने नगर निगम की हाउस मीटिंग में न पहुंचने के बारे में पूछे जाने पर कहा कि उन्हें फोन पर मीटिंग कैंसल होने की सूचना मिल गई थी, इसलिए नहीं पहुंचे। उन्होंने मीटिंग में मेयर सहित कुछ पार्षदों के पति और बेटे के पहुंचने पर भी सवाल उठाए।
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इच्छाशक्ति के बावजूद हम अफसरों से कैसे काम कराएं : मेयर
मेयर उपिंदर कौर अहलूवालिया मानती हैं कि विकास कार्यों की रफ्तार धीमी हैं। इसके लिए अधिकारी और वो लोग जिम्मेदार हैं, जिनके इशारे पर काम आगे नहीं बढ़ने दिया जा रहा है। मेयर ने विधायक पर आरोप लगाया कि अगर शहर के विकास की उन्हें फिक्र होती तो मीटिंग में शामिल होते हैं और अधिकारियों को भी बैठक में लेकर आते। उन्होंने कहा कि शहर मेरा-तेरा नहीं हम सबका है, यहां विकास पर ऐसी राजनीति की जगह नहीं होनी चाहिए। वो इच्छाशक्ति की बात करते हैं। जब अफसर और कर्मचारी काम ही नहीं करेंगे तो इच्छाशक्ति के बावजूद हम कैसे काम कराएंगे। मेयर ने आरोप लगाया कि नगर निगम के कार्योेें में दखलंदाजी से भी कार्य प्रभावित हुए हैं, क्योंकि मीटिंग में रखे गए विकास कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर प्रस्ताव पास कर, उस पर तत्काल अमल करने को कहा गया है। विधायक का नाम लिए बिना उन्होंने कहा कि इसे पूरा कराने में अगर देरी हो रही है तो वो लोग जिम्मेदार हैं, जो पर्दे के पीछे अपने इशारे पर निगम चलाने की कोशिश में हैं। पिछले साल हुई मीटिंग में भी इन्हीं लोगों के इशारे पर अधिकारियों ने बहिष्कार किया था।

सरकार, अधिकारी और मेयर सभी अपनी राजनीति चमकाने में लगे हुए हैं। लेकिन इसका खामियाजा शहरवासियों को बुनियादी समस्याओं के तौर पर भुगतना पड़ रहा है। बारिश से पहले सेक्टरों में कचरा, सीवरेज और रोड गली की सफाई नहीं की गई, जबकि पहले हो चुकी मौतें सड़कों के गड्ढे यहां के हालात खुद बयां कर रहे हैं।
-प्रवीण आत्रेय, प्रदेश प्रवक्ता, इनेलो

विकास कार्यों को पूरा करना सरकार की जिम्मेदारी है। किसी भी पार्टी का मेयर क्यों न हो विकास प्रभावित नहीं होना चाहिए। लोगों को प्रॉपर्टी टैक्स चुकाने के बाद भी समस्याओं के अलावा कुछ नहीं मिल रहा है। इसे पूरा करने की जिम्मेदारी भी सरकार की है। बारिश से पहले की सफाई, सड़कों पर गड्ढे सहित तमाम समस्याएं हैं, जो दूर होनी चाहिए। ताकि शहरवासियों को राहत मिल सके। डंपिंग ग्राउंड सहित अन्य मुद्दों से जुड़ी समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर सुलझाना चाहिए।
-जिलाध्यक्ष, इनेलो, प्रदीप चौधरी।

शहर बुनियादी सुविधाओं के अभाव से जूझ रहा हैं। गांवों में हालात और भी खराब हैं। इन समस्याओं को जो राजनीति से ऊपर उठकर हल करेगा। वही जनता की नजरों में राज करेगा। ये परेशानियां धीरे धीरे बढ़ती जा रही हैं। 
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-तरुण भंडारी, कांग्रेसी नेता
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