फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पीजीआई इलाज कर रहा या कोरोना फैलाने का इंतजाम, डॉक्टरों को किट-नर्सों को अच्छे मास्क तक नहीं

Tue, 21 Apr 2020 03:23 PM IST
पंचकुला ब्‍यूरो अमर उजाला, चंडीगढ़
विज्ञापन
पीजीआई चंडीगढ़ का स्टाफ - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
पीजीआई इंप्लाई यूनियन नॉन फैकेल्टी ने कोरोना के इलाज में मानकों की अनदेखी का गंभीर आरोप लगाते हुए पीजीआई डायरेक्टर को आगाह किया है। यूनियन के अध्यक्ष अश्वनी कुमार मुंजाल ने इस संबंध में पीजीआई प्रशासन को विभिन्न स्तरों पर बरती जा रही लापरवाही को लेकर लिखित सूचना दी है। उनका कहना है कि इन लापरवाहियों के कारण पीजीआई कोरोना फैलाने का काम कर रहा है।
विज्ञापन


मुंजाल का कहना है कि आइसोलेशन वार्ड से लेकर कोविड इमरजेंसी तक पीजीआई के डॉक्टरों और अन्य स्टाफ का बेरोक टोक आना-जाना लगा रहता है। फीस काउंटर पर कोविड वार्ड और आइसोलेशन वार्ड में भर्ती मरीजों की फाइल बिना सैनिटाइज प्रोसेस के भेजी जा रही है। नतीजतन सोमवार को फीस काउंटर पर ड्यूटी करने वाले दो स्टाफ को आइसोलेशन में भर्ती किया गया। इससे पीजीआई इंप्लाई यूनियन नॉन फैकेल्टी के पदाधिकारियों में काफी रोष है। यूनियन ने पीजीआई प्रशासन से तत्काल बचाव की व्यवस्था करने की मांग की है।

ओराप 1 : पहले पॉजिटिव मरीज की मौत के बाद भी नहीं जागा प्रबंधन
अश्वनी ने कहा है कि 31 मार्च को पीजीआई में पहले पॉजिटिव मरीज की मौत हुई थी। इसके बाद पीजीआई प्रबंधन हरकत में आया। तब तक सेफ्टी किट के नाम पर पीजीआई के पास कुछ नहीं था। न तो पर्सनल प्रोटेक्शन इक्युपमेंट (पीपीई) किट और न तो एन-95 मास्क तक की सप्लाई थी। नतीजतन लगभग 40 ट्रेंड स्टाफ को क्वारंटीन करना पड़ा। इसके बावजूद भी पीजीआई प्रशासन ने कोरोना का अलग से वार्ड नहीं बनाया और न ही सेफ्टी किट दी। उसी इमरजेंसी वार्ड में दो मौतें और हो गईं, जिसमें एक कोरोना पॉजिटिव था। इसके बावजूद भी पीजीआई नहीं जागा।
विज्ञापन


ओराप 2 : पीजीआई प्रशासन कर रहा स्टाफ के बीच भेदभाव
अश्वनी मुंजाल ने आरोप लगाया है कि कोरोना के मरीजों के बीच ड्यूटी कर रहे स्टाफ और डॉक्टरों के बीच भी भेदभाव किया जा रहा है। अश्वनी का आरोप है कि डॉक्टरों को पीपीई किट दी गई है जबकि नर्सिंग और हॉस्पिटल अटेंडेंट्स, सैनिटेशन अटेंडेंट और सिक्योरिटी गार्ड्स को सुरखा उपकरण के नाम पर एक साधारण कपड़े का मास्क दिया गया। उन्हें न तो कोई एन-95 मास्क और न ही गाउन उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके चलते एक हेल्थ वर्कर और उसके संपर्क में आए उसके घर के चार लोग पॉजिटिव आ चुके हैं।
विज्ञापन

आरोप 3 : पीजीआई में कोई मानक ही नहीं
अश्वनी मुंजाल का आरोप है कि कोरोना के मरीजों से संबंधित स्थानों पर काम करने वाले इंप्लाइज को घर जाने संबंधी कोई मानक ही नहीं है। जिसे मन करता है वो रुकता है नहीं तो घर चला जाता है। अश्वनी मुंजाल का कहना है की हैरानी इस बात की है कि पीजीआई ने कर्मचारियों को उनकी मर्जी पर छोड़ दिया है। यूनियन के कहने के बावजूद पीजीआई ने लापरवाही की। उनका कहना है कि जो सीडी वार्ड में काम कर रहे हैं, उन्हें घर न भेजा जाए जबकि पीजीआई के पॉजिटिव आए दोनों हेल्थ वर्कर रोजाना ड्यूटी कर घर जाते थे।

31 मार्च को ही कर दिया था आगाह
अश्वनी मुंजाल का कहना है कि हमने 18 मार्च को पीजीआई प्रशासन को सावधान कर दिया था। 31 मार्च को डायरेक्टर को लिखित में कह दिया था की पीजीआई के यही हालात रहे तो ये कोरोना वॉरियर्स की अपनी संख्या चंडीगढ़ के कुल कोरोना पीड़ित संख्या से आगे निकल जाएगी। 5 अप्रैल की मीटिंग बुलाई गई, जिसमें झूठे आश्वासन दिए गए कि सभी को सेफ्टी किट दी जाएगी। लेकिन पता यह चला है कि पीजीआई को 7 अप्रैल तक 500 ही पीपीई किट मिल पाईं हैं, जबकि साढ़े 18 हजार पीपीई किट खरीदने के लिए 20 मार्च से लेकर 7 अप्रैल तक फाइलों में काम होता रहा।

कोरोना से बचाव के सभी आवश्यक उपकरण और संसाधन पीजीआई में उपलब्ध हैं। जहां तक डॉक्टरों और अन्य स्टाफ के बचाव की व्यवस्था की बात है तो इस पर हर स्तर पर गंभीरता से नजर रखी जा रही है।
- डॉ. अशोक कुमार, पीजीआई प्रवक्ता
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें