पिंजौर। सूरजपुर-सुखोमाजरी बाईपास का काम दो साल में पूरा होना प्रस्तावित था लेकिन रेलवे ट्रैक के नीचे आरयूबी निर्माण के कारण देरी होती रही। अब नए साल में लोगों को इस बाईपास का तोहफा मिल सकता है। जिससे शहरवासियों को जाम से निजात मिल सकेगी।
क्योंकि इस बाईपास निर्माण में अड़गा साबित हो रहे आरयूबी का निर्माण मंगलवार को गर्डर लगाने के साथ शुरू हो गया। मंगलवार को रेलवे की ओर से 8 घंटे का ब्लॉक दिया गया। सुबह करीब साढ़े 8 बजे काम शुरू किया। 32.1 मीटर का रेलवे ट्रैक हटाकर प्रोटेक्शन गर्डर को चार हिस्सों में लगा दिया गया। इसके बाद चारों हिस्सों को जोड़कर फिर से ट्रैक को लगा दिया गया। गर्डर लगते ही यह यह अस्थाई ब्रिज की तरह काम करेगा।
इस ट्रैक पर अब ट्रेन 20 या 30 किलोमीटर प्रतिघंटा की गति से निकलेंगीं। इसके बाद नीचे ब्लॉक पुशिंग का काम शुरू होगा। अगर नीचे से मिट्टी धंसती भी है तो भी ऊपर से ट्रेन 20 या 30 की स्पीड से ट्रैक से गुजरती रहेगी। मंगलवार के बाद प्रतिदिन 1 या 2 मीटर की पुशिंग होती रहेगी और करीब 45 दिन में पांच बॉक्स ट्रैक के नीचे उचित स्थान पर पहुंच जाएंगे। उसके बाद कार्रवाई पूरी होने के बाद गर्डर हटा दिए जाएंगे। तब ट्रेन नॉर्मल गति से ट्रैक से गुजर सकेगी।
नए साल में मिलेगा वाहन चालकों को सूरजपुर सुखोमाजरी बाईपास का तोहफा,शहर को मिलेगी जाम से मुक्ति।
बता दें कि दो साल में बनने वाला सूरजपुर-सुखोमाजरी बाईपास का काम सात साल बाद भी पूरा नहीं हो पाया है। इसके निर्माण में हो रही देरी के चलते न केवल लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है बल्कि निर्माण लागत में भी इजाफा हो रहा है। पिंजौर में लगातार लगने वाले जाम की समस्या से वाहन चालकों को निजात दिलाने के लिए करीब 7.70 किलोमीटर लंबे इस बाईपास का शिलान्यास केंद्रीय मंत्री नितिन गड़करी ने मई 2017 में किया था।
विभागीय अधिकारियों ने बताया कि बाईपास निर्माण का अधिकतर काम पूरा हो चुका है। बुधवार से ट्रैक के नीचे बॉक्स पुशिंग का काम शुरू हो जाएगा और प्रतिदिन एक या दो मीटर ही बॉक्स को पुश किया जाएगा और इस काम को पूरा होने में करीब 45 दिन लग सकते हैं। अधिकारियों का कहना है कि तकरीबन ढाई से तीन महीने में सूरजपुर सुखोमजारी बाईपास बनकर पूरी तरह तैयार हो जाएगा।