पंचकूला। पंचकूला में चल रहे सरस मेले के तीसरे दिन रविवार को अवकाश के कारण भारी भीड़ उमड़ी। मेला इस बार रंगों, स्वाद और भारतीय संस्कृति का अद्भुत संगम बन गया। चंडीगढ़, मोहाली और हिमाचल से बड़ी संख्या में लोग मेले का आनंद लेने पहुंचे। खचाखच भरे ग्राउंड में हर तरफ उल्लास और उमंग का माहौल देखने को मिला।
मेले का सबसे बड़ा आकर्षण भव्य फूड कोर्ट रहा जहां उत्तर और पश्चिम भारत के पारंपरिक व्यंजनों की खुशबू वातावरण में फैली हुई थी। पंजाब के मक्के की रोटी और सरसों का साग, हरियाणा की बाजरे की खिचड़ी और मठरी, राजस्थान का दाल-बाटी-चूरमा और गट्टे की सब्जी, महाराष्ट्र की पाव भाजी और मिसल पाव, हिमाचल के सिड्डू और चना मदरा जैसे व्यंजन लोगों का ध्यान खींच रहे थे। हर स्टॉल अपने राज्य की संस्कृति, परंपरा और स्वाद की अनोखी झलक पेश कर रहा था।
यादगार पल कैमरों में कैद किए
भोजन प्रेमियों ने परिवार और दोस्तों संग विविध व्यंजनों का लुत्फ उठाया और यादगार पल कैमरों में कैद किए। फूड कोर्ट के अलावा मेले में ग्रामीण हस्तशिल्प, हैंडलूम, जैविक उत्पाद, मिट्टी के बर्तन, पारंपरिक आभूषण और महिलाओं द्वारा तैयार किए गए उत्पाद भी खूब आकर्षण का केंद्र बने। महिलाएं और स्वयं सहायता समूह अपनी कला और मेहनत को नए मंच पर प्रदर्शित कर रहे हैं।
सरस मेला आत्मनिर्भर बनने की दिशा में प्रोत्साहित कर रहा
सरस मेला न केवल मनोरंजन का माध्यम है बल्कि ग्रामीण उद्यमियों को आत्मनिर्भर बनने की दिशा में प्रोत्साहित भी कर रहा है। यह मंच गांवों के हुनर को शहर तक पहुंचाने का माध्यम बन गया है। हरियाणा ग्रामीण आजीविका मिशन के सहयोग से आयोजित मेला पंचकूला के नागरिकों के लिए हर साल की तरह इस बार भी उत्सव, संस्कृति और स्वाद का संगम लेकर आया है।