एक साल पहले एक हादसे में सुंदर अपना हाथ जरूर गंवा बैठे, लेकिन हौसला नहीं गंवाया। नतीजा सामने है कि सुंदर दिव्यांग हैं, लेकिन वह रिकार्ड तोड़ प्रदर्शन करते हैं। सुंदर ने अपने इसी हौसले के दम पर पैरा ओलंपिक में बनाए गए जेवलिन थ्रो का रिकार्ड पैरा नेशनल एथलेटिक मीट के दौरान ही तोड़ दिया।
जयपुर (राजस्थान) के रहने वाले सुंदर हमेशा से ऐसे नहीं थे। वह तो एक जेवलिन थ्रोअर रहे हैं। छह महीने पहले की ही बात है कि उनका कैरियर का ग्राफ तेजी से आगे बढ़ रहा था। वह जयपुर के जाने माने जेवलिन थ्रोअर में गिने जाते थे।
एक हादसा हुआ और वह हाथ गंवा बैठे। पंचकूला के ताऊ देवीलाल स्पोर्ट्स कांप्लेक्स में आयोजित नेशनल पैरा एथलेटिक मीट के दौरान सुंदर ने बताया कि उनका बायां हाथ दोस्त के घर में एक लोहे की शीट उतारते वक्त कटकर अलग हो गया था। उनके दोस्तों ने हाथ को जुड़वाने की कोशिश भी की।
लेकिन देर हो चुकी थी। एक पल तो सुंदर को लगा कि सारा कैरियर तबाह हो गया। उनकी उम्मीद जवाब देने लगी थी कि उनकी मुलाकात हो गई एक द्रोणाचार्य अवार्डी आरडी सिंह से। जिन्होंने एक बार फिर से उनके जीवन में रोशनी की किरण बिखेर दी।
जैवलिन लहराया तो सभी पिछड़ गए
सुंदर बताते हैं कि द्रोणाचार्य अवार्डी आरडी सिंह ने उनको जैवलिन थ्रो में माहिर किया। शुरूआत में उनको अटपटा लगता था, फिर आदत बनती गई। वह तीन घंटे जयपुर के सवाईं मानसिंह स्टेडियम में प्रेक्टिस करने लगे। जब पैरा नेशनल एथलेटिक मीट में उतरे तो अपने ही राज्य दिव्यांग देवेंद्र झागड़िया द्वारा एथेंस में 2004 के दौरान बनाया गया 62.15 मीटर का रिकार्ड तोड़ डाला। सुंदर ने नया रिकार्ड 68.42 मीटर का बनाया है। यह पैरा नेशनल एथलेटिक मीट का भी 46 कैटेगरी (दिव्यांगों की खास कैटेगरी अंग के आधार पर) में नया रिकार्ड है।
2015 में हुआ था हादसा
20 वर्षीय सुंदर का वर्ष 2015 में लोहे की चादर उतारते समय हाथ कट गया था। वह पांच माह बेड पर रहे। कैरियर तबाह होने के कगार पर था। सुंदर ने बताया कि हाथ कटने के बाद लोगों के सामने जाने में कतराते थे। हाथ ठीक होने के बाद एक माह तक घर से बाहर नहीं निकले। फिर बड़े भाई हरिओम ने उनका साथ दिया और द्रोणाचार्य अवार्डी से मिलवाया। सुंदर ने बताया कि उनसे मिलने के बाद खेल को देखने का नया नजरिया मिला। सुंदर ने मार्च 2016 के दौरान ही दुबई में ख्वाजा इंटरनेशनल ग्रैंडपिक्स चैंपियनशिप में पहला स्थान हासिल किया। इसके लिए राज्य सरकार ने पांच लाख रुपये देने की घोषणा की है। हाथ गंवाने के पहले सुंदर ने एसजीएफआई द्वारा आयोजित की जाने वाली स्कूल नेशनल में गोल्ड मेडल जीते और इंटरनेशनल चैंपियनशिप की तैयारी में जुटे थे।
जिसके लिए पिता ने कर्ज भी लिया था।