‘डीसी अंकल, मेरी फीस जमा करवा दीजिए। पापा को 20 महीने से सैलरी नहीं मिली है। इसके चलते स्कूल फीस भी जमा नहीं हो पाई है। यदि फीस जमा नहीं हुई तो स्कूल से नाम कट जाएगा और हम पढ़ नहीं पाएंगे।’ ये पुकार आंखों में आंसू और उम्मीद लिए अद्मया और जसमीत पंचकूला डीसी मनदीप सिंह बराड़ से की।
दोनों बच्चे मंगलवार को पिंजौर स्थित एचएमटी फैक्टरी से निकली पदयात्रा में अपने पापा को हक दिलाने की मांग को लेकर शामिल हुए थे। अद्मया कालका के सूफिया कॉन्वेंट स्कूल में 7वीं और जसमीत चंडीगढ़ स्थित गवर्नमेंट स्कूल में 8वीं का छात्र है।
बच्चे रोक नहीं पाए अपने आंसू
पंचकूला के बेला बिस्टा चौक एचमटी कर्मचारियों से जिस वक्त उपायुक्त मनदीप सिंह बराड़ ज्ञापन लेने पहुुंचे तो उन्हें अद्मया और जसमीत दोनों बच्चों ने घेर लिया। बच्चों की मांग पर उपायुक्त बस इतना ही बोले बेटा चिंता मत करो जल्द समाधान होगा।
वह उनकी मांग को सरकार तक जरूर पहुंचाएंगे। इतना सुनते ही बच्चों की आंखों में आंसू भर आया। बच्चे निराश हो गए और बोले लेकिन अंकल जी स्कूल की फीस कैसे जमा होगी। इसके बाद उपायुक्त कुछ बोल नहीं पाए।
अंकल जी पापा को कब मिलेगी सैलरी
दोनों बच्चों ने उपायुक्त मनदीप सिंह बराड़ से कहा कि अंकल जी पापा को सैलरी कब मिलेगी। अद्मया ने कहा कि उसकी हर माह करीब 3600 रुपये स्कूल फीस जाती है। लेकिन पिता के पास पैसे नहीं हैं। जसमीत ने भी कहा कि सैलरी न मिलने के कारण पापा ने बैंक से लोन ले रखा है। वह उसकी किस्त नहीं भर पा रहे हैं। हमारी स्कूल की फीस कहां से जमा करेंगे।
महिलाएं बोलीं, घर में एक पैसा नहीं, कैसे जलेगा चूल्हा
उपायुक्त मनदीप सिंह बराड़ ज्ञापन लेने के बाद जैसे ही अपनी कार में सवार होकर हुए। कार को बीच सड़क में महिलाओं ने रोक लिया। उपायुक्त से पहला सवाल महिलाओं का था कि घर की दाल रोटी कैसे चलेगी। घर में एक फूटी कौड़ी नहीं है।
वह कुछ बोल पाते। तब तक दूसरी महिला ने कहा 20 माह से वेतन न मिलने की वजह से लोग कर्ज में डूब चुके हैं। मुलाजिम सुसाइड करने लगे हैं। वह इतना ही कहते रहे कि उनकी बात वह सरकार तक जरूर पहुंचाएंगे।