डीन प्रो. सतीश गंधर्व बोले- आयुर्वेद की पंचकर्म पद्धति को वैश्विक स्तर पर मिल रही मान्यता
माई सिटी रिपोर्टर
पंचकूला। राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान (एनआईए) पंचकूला में पंचकर्म टेक्निशियन सर्टिफिकेट कोर्स (बैच-2026) का इंडक्शन प्रोग्राम आयोजित किया गया। संस्थान के डीन प्रभारी प्रो. सतीश गंधर्व ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। कोर्स इंचार्ज डॉ. अनुराग कुशल ने डीन प्रभारी और उप चिकित्सा अधीक्षक (डीएमएस) का पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया।
प्रो. सतीश गंधर्व ने कहा कि आयुष मंत्रालय, भारत सरकार के तत्वावधान में राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान के कुलपति प्रो. (डॉ.) संजीव शर्मा और डीन प्रो. गुलाब पमनानी के मार्गदर्शन में नए पाठ्यक्रम तैयार किए जा रहे हैं। पंचकर्म टेक्निशियन कोर्स शुरू होने से हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और चंडीगढ़ के युवाओं को आयुर्वेद चिकित्सा क्षेत्र में जुड़ने के नए अवसर मिलेंगे।
उन्होंने कहा कि आयुर्वेद की पंचकर्म पद्धति को वैश्विक स्तर पर पहचान मिल रही है। यह केवल रोगों के उपचार तक सीमित नहीं, बल्कि शरीर के पुनरुत्थान और संतुलन की वैज्ञानिक प्रक्रिया है। आधुनिक जीवनशैली, प्रदूषण, अनियमित खानपान और मानसिक तनाव के कारण मधुमेह, उच्च रक्तचाप, मोटापा, अनिद्रा और अवसाद जैसे रोग बढ़ रहे हैं। ऐसे में लोग प्राकृतिक उपचार की ओर रुख कर रहे हैं और पंचकर्म एक सुरक्षित व दीर्घकालिक समाधान के रूप में उभर रहा है।
इंडक्शन कार्यक्रम में प्रो. प्रह्लाद रघु और एडीओ सतपाल एसवाल ने भी विद्यार्थियों से संवाद किया। डीएमएस डॉ. गौरव गर्ग ने विद्यार्थियों को रोगियों के साथ संवेदनशील व्यवहार रखने की सीख देते हुए कहा कि उपचार के साथ व्यवहार भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि पंचकर्म क्षेत्र में रोजगार की अपार संभावनाएं हैं और एनआईए में शुरू हुआ यह पहला बैच नई दिशा तय करेगा।