चंडीगढ़। पंजाब में धान खरीद के पांच दिन बीतने के बावजूद अब तक कई मंडियों में खरीद का काम सुचारु रूप से शुरू नहीं हो पाया है। अभी भी सूबे की मंडियों में 37 हजार मीट्रिक टन से अधिक धान की फसल मंडी परिसर में खुले में पड़ी हुई है उसका उठान नहीं हो पाया है। इसे लेकर किसानों में रोष है। उन्हें डर है कि बारिश होने की स्थिति में उनकी फसल पूरी तरह से भीग जाएगी।
बारिश को देखते हुए केंद्र ने इस बार धान खरीद के लिस 1 के बजाय 11 अक्तूबर की तिथि तय की थी। हालांकि किसानों के विरोध और पंजाब-हरियाणा सरकार की मांग को देखते हुए केंद्र ने 3 अक्तूबर से धान खरीद किए जाने की घोषणा की थी। धान खरीद के 5 दिन बाद भी पंजाब में अभी तक मंडियों में धान की सुचारु खरीद शुरू नहीं हो पाई है। चौथे दिन तक राज्य की मंडियों में कुल 278483.25 मीट्रिक टन से अधिक धान की आमद हो चुकी है, जिसमें से 241225.30 मीट्रिक टन की ही खरीद हो पाई है। अभी भी 37257.95 मीट्रिक टन धान मंडी परिसर में खुले में पड़ा है। इसके कारण किसानों में रोष है।
मोगा के किसान दिलबाग सिंह ने बताया कि वह दो दिन पहले मंडी में धान लेकर पहुंचे थे, लेकिन उठान नहीं हो पाने के कारण धान खुले में पड़ा है। बारिश होने पर फसल भीगने का खतरा है, जिससे उनकी महीनों की मेहनत पर पानी फिर जाएगा। कई बार मंडी के अधिकारियों से कहा गया है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
इधर, विभागीय अधिकारियों का कहना है कि नमी ज्यादा होने के कारण धान की खरीद होने में परेशानी आ रही है। मंडियों में अधिकांश धान की फसल में 17 प्रतिशत से ज्यादा नमी मिल रही है, जिसके कारण खरीद नहीं हो पा रही है।