चंडीगढ़ पीजीआई के सातवें वार्षिक रिसर्च डे के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम में रोपड़ आईआईटी के डायरेक्टर डा. सरित दास ने दो टूक कहा कि रिजल्ट चाहिए तो कड़े फैसले लेने होंगे। जो काम न करें, उसे आउट करने में बिल्कुल भी हिचकिचाना नहीं चाहिए। जो टैलेंटेड हो, उसे प्रमोट करने में कोई कसर नहीं छोड़नी चाहिए। उसके लिए भले ही आपको आउट ऑफ द बाक्स जाकर फैसला लेना पड़े। क्वालिटी रिसर्च पर जोर देना होगा। बहानेबाजी और डिपार्टमेंटल पॉलिटिक्स करने के बजाए क्वालिटी रिसर्च पर बात करनी होगी।
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उन्होंने बताया कि रोपड़ आईआईटी में टैलेंटेड फैकल्टी लाने के लिए कम से कम दस देशों का दौरा किया। वहां जाकर खुद इंटरव्यू किया। अच्छी फैकल्टी लेकर आए। क्वालिटी रिसर्च के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर और माहौल बनाया। यही दोनों रिसर्च को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि पीजीआई और रोपड़ आईआईटी को सस्ती स्वास्थ्य सेवा की सामाजिक आवश्यकता को पूरा करने के लिए अनुसंधान में हाथ मिलाने पर जोर दिया। साथ ही कहा कि अनुसंधान पर खर्च बढ़ाने की बात पर भी जोर दिया।
वर्तमान में जीडीपी का मात्र 0.6 प्रतिशत है। इस मौके पर मुख्य अतिथि के तौर पर मौजूद पंजाब यूनिवर्सिटी के पूर्व वाइस चांसलर डा. अरुण ग्रोवर ने कहा कि क्षेत्रीय अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए क्षेत्र के विभिन्न संस्थानों के बीच साझेदारी को बढ़ावा देने की आवश्यकता है। पीजीआई के पूर्व डीन व नेत्र विशेषज्ञ डा. आमोद गुप्ता ने इस दौरान विवादास्पद रिसर्च की कहानियों को साझा किया। उन्होंने नैतिक मानकों का पालन करने के साथ नैतिक नुकसान से बचने के लिए अतीत से सीखने पर जोर दिया।
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प्रोफेसर जगतराम ने कहा कि पिछले साल पीजीआई ने सभी मानकों को पालन करते हुए 1850 रिसर्च पेपर प्रकाशित किए। रिसर्च डे के मौके पर 400 से ज्यादा पेपर डिस्पले किए गए। इस मौके पर 31 से ज्यादा रिसर्चरों को सम्मानित भी किया गया। इस मौके पर डा. राजेश कुमार डीन एकेडमिक्स, डा. अरविंद राजवंशी डीन रिसर्च मौजूद रहे।
पल्मोनरी मेडिसिन के असिस्टेंट प्रोफेसर डा. इंदरपाल एस सहगल, पल्मोनरी मेडिसिन के असिस्टेंट प्रोफेसर डा. वालियापन मुट्टू, हीप्टोलॉजी के असिस्टेंट प्रोफेसर डा. निपुन वर्मा, स्कूल आफ पब्ल्कि हेल्थ के एडिश्नल प्रोफेसर डा. रविंद्रा खैवाल, स्किन डिपार्टमेंट के डा. एमएस कुमारन, पल्मोनरी मेडिसिन के एडिशनल प्रोफेसर डा. नवनीत सिंह, पीडियाट्रिक के प्रोफेसर डा. एम जयश्री, पल्मोनरी मेडिसिन के प्रोफेसर डा. रितेश अग्रवाल, हीप्टोलाजी के प्रोफेसर डा. अजय डुसेजा, आई डिपार्टमेंट के असिस्टेंट प्रोफेसर डा. मोहित डोगरा, न्यूरोसर्जरी के असिस्टेेंट प्रोफेसर डा. मंजुल त्रिपाठी, आर्थोपीडिक्स के असिस्टेंट प्रोफेसर डा. सिद्धार्थ शर्मा, न्यूरोसर्जरी के एडिशनल प्रोफेसर डा. डांढापानी, न्यूरोसर्जरी के एडिशनल प्रोफेसर डा. प्रवीण सालुके, आई डिपार्टमेंट के एडिशनल प्रोफेसर डा. रीमा बंसल, आर्थोपीडिक्स के प्रोफेसर डा. आदित्य के अग्रवाल, आई डिपार्टमेंट की डा. वैशाली गुप्ता, एनेस्थीसिया की प्रोफेसर डा. काजल जैन, हीप्टोलाजी के डा. श्रीजेश एस, साइटोलाजी के डा. परीक्षा गुप्ता, इम्यूनोपैथोलाजी की डा. सीमा छाबड़ा, फार्माकोलाजी की डा. स्मिता, मेडिकल माइक्रोबायोलाजी की डा. अनूप के घोस, डा. बलविंदर मोहन, डा. शिवाप्रकाश, डा. रूद्धमुर्थि व डा. कुसुम शर्मा, बायोफिजिक्स की डा. शालमोली भट्टाचार्य, मेडिकल माइक्रोबायोलाजी की पीएचडी स्कालर डा. गुंजीत कौर, डा. सैकत पॉल, पैथोलाजी की सीनियर रेजिडेंट डा. सानिया शर्मा व पीडियाट्रिक की डा. मोनिसा को सम्मानित किया गया।