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Panchkula News: पंजाब में छह महिला उम्मीदवारों में से केवल एक ने मारी बाजी

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पटियाला। संसद में पंजाब से महिलाओं का प्रतिनिधित्व कम रहा है। इस बार के लोकसभा चुनाव की बात करें तो कांग्रेस, शिरोमणि अकाली दल और भाजपा ने छह महिला उम्मीदवारों को मैदान में उतारा था। इनमें से केवल हरसिमरत कौर बादल ने ही बठिंडा से बाजी मारी है। इसी तरह से 2014 के चुनाव में भी हरसिमरत बादल ही बठिंडा से जीत कर लोकसभा तक का सफर तय कर सकी थीं। 2019 में हरसिमरत कौर के अलावा परनीत कौर भी पटियाला से चुनाव जीती थीं।पंजाब की करीब 50 फीसदी आबादी महिलाओं की है। पंजाब के कुल 2 करोड़ 12 लाख 71 हजार 246 वोटरों में से 1 करोड़ 77 हजार 543 महिला मतदाता हैं, लेकिन प्रमुख सियासी दल भी महिला उम्मीदवारों पर भरोसा नहीं जताते हैं। इस बार के लोकसभा चुनाव में केवल छह महिलाओं को टिकट मिला था। सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी ने एक भी टिकट महिला उम्मीदवार को नहीं दिया, लेकिन भाजपा ने तीन टिकटें, कांग्रेस ने दो और अकाली दल ने केवल एक टिकट महिला उम्मीदवार को दिया।
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इस बार इन महिलाओं को मिला था टिकट
भाजपा ने पटियाला से परनीत कौर, बठिंडा से परमपाल कौर और होशियारपुर से अनीता सोम प्रकाश को टिकट दिया था। वहीं, कांग्रेस ने होशियारपुर से यामिनी गोमर और फरीदकोट से अमरजीत कौर साहोके को टिकट दिया गया था। अकाली दल ने हरसिमरत कौर बादल को बठिंडा से मैदान में उतारा था। इनमें से केवल हरसिमरत कौर बादल ही जीत दर्ज कर सकी हैं।

महिलाओं को टिकट कम मिलेगा तो प्रतिनिधित्व घटना स्वाभाविक ः प्रो. टिवाणा
पटियाला की पंजाबी यूनिवर्सिटी से जाने-माने राजनीतिक मामलों के माहिर प्रोफेसर बलविंदर सिंह टिवाणा का कहना है कि महिलाओं को टिकट ही कम मिलता है, तो फिर पंजाब से लोकसभा में महिलाओं का प्रतिनिधित्व कम रहना स्वाभाविक ही है। इसका एक कारण यह भी है कि पंजाब में अपने बलबूते कम महिलाएं राजनीति में आगे आ पा रही हैं। आप की कुछ महिला विधायकों या फिर महिला कैबिनेट मंत्रियों को छोड़कर ज्यादातर बाकी महिलाएं राजनीति में आगे अपने राजनीतिक विरासत वाले परिवारों के कारण ही आ पाई हैं।
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