चंडीगढ़। जजों के रिक्त पदों के चलते पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में लंबित मामलों की संख्या 4,33,253 पहुंच गई है। इनमें 1,61,362 आपराधिक मामले हैं, जबकि 2,71,891 मामले सिविल हैं। हाईकोर्ट में वर्तमान में जजों के 85 स्वीकृत पद हैं और वर्तमान में केवल 54 जज कार्यरत हैं, ऐसे में एक तिहाई से अधिक पद खाली हैं। चिंताजनक बात यह है कि वर्ष 2025 तक 6 जज और रिटायर हो जाएंगे। नौ जिला एवं सत्र न्यायाधीशों को हाईकोर्ट का जज बनाने की सिफारिश की जा चुकी है, लेकिन इन नियुक्तियों में अभी काफी समय लगेगा।
हाईकोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश के बाद नियुक्तियों के लिए मामला राज्य और राज्यपालों मंजूरी की मंजूरी के लिए जाता है। इसके बाद इंटेलिजेंस ब्यूरो की रिपोर्ट के साथ इन नामों को सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम के समक्ष प्रस्तावित किया जाता है। पदोन्नति के लिए स्वीकृत नामों को राष्ट्रपति द्वारा नियुक्ति वारंट पर हस्ताक्षर करने से पहले केंद्रीय कानून मंत्रालय को भेजा जाता है। यदि प्राथमिकता के आधार पर सभी स्तर पर काम नहीं होता है तो नियुक्ति में कई महीने लग जाते हैं।
लंबे समय से लंबित मामलों की संख्या एक लाख के पार
राष्ट्रीय न्यायिक डाटा ग्रिड के अनुसार 1,12,754 (26 प्रतिशत) लंबित मामले ऐसे हैं जो 10 साल से अधिक पुराने हैं। 53,427 या 12 प्रतिशत लंबित मामले एक से तीन साल पुराने हैं। 49,105 (11 प्रतिशत) मामले तीन से पांच वर्ष पुराने हैं। 1,17,805 या 27 प्रतिशत मामले पांच से 10 साल पुराने हैं। गत वर्ष नवंबर से नई नियुक्ति न होने के कारण जजों की कमी गंभीर समस्या बनी हुई है। यही लंबित मामलों की इतनी बड़ी संख्या का कारण है।