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अब तकनीकी जांच के बाद ही कर्मचारियों को बांटी जाएंगी घड़ियां

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चंडीगढ़। नगर निगम की सफाई कर्मचारी यूनियन के सदस्यों ने स्मार्ट वॉच के विरोध में वीरवार को सेक्टर-17 स्थित निगम कार्यालय के बाहर रोष प्रदर्शन किया। कमिश्नर केके यादव ने कर्मचारी यूनियन के पदाधिकारियों से समस्या के संबंध में चर्चा की। उसके बाद तय हुआ कि घड़ी से शरीर पर होने वाले दुष्प्रभावों के बारे में जांच कराई जाएगी। उसके बाद ही आगे कर्मचारियों को घड़ियां बांटी जाएंगी।
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नगर निगम ने अपने चार हजार कर्मचारियों को स्मार्ट वॉच देने का फैसला लिया था। 3 फरवरी से कमिश्नर ने कर्मचारियों को घड़ियां देना शुरू कर दिया है। कुछ कर्मचारी ने शिकायत की कि इस घड़ी को पहनने के बाद चक्कर आने लगे हैं और अन्य शारीरिक समस्याएं हो रहीं हैं। उसके बाद कर्मचारी यूनियन ने 27 फरवरी को विरोध प्रदर्शन की घोषणा की। यूनिय प्रधान कृष्ण कुमार चड्ढा के नेतृत्व में कई ट्रेड यूनियन ने निगम के सामने प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रधान ने कहा कि यह घड़ियां उन्हें गुलामी का एहसास करा रहीं हैं। नगर निगम अफसरों ने मनमानी करते हुए यह नियम लागू किया है, जो कि कर्मचारियों के शोषण को दर्शाता है। यदि यह निर्णय वापस नहीं लिया गया तो शहर की 32 यूनियन काम छोड़ हड़ताल करेंगी। उसके बाद कमिश्नर ने सबको चर्चा के लिए बुलाया। पूर्व मेयर राजेश कालिया के नेतृत्व में कमिश्नर संग कर्मचारियों की बैठक हुई। इसमें तय हुआ कि घड़ियों की जांच करा लेते हैं ताकि पता चल सके कि इससे कुछ शारीरिक दुष्परिणाम तो नहीं होते हैं। उसके बाद ही कर्मचारियों को घड़ी बांटी जाएगी। इस मौके पर महासचिव ओमपाल सिंह कई अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।
पूर्व में कई कर्मचारियों के घर बैठकर सैलरी लेने का मामला कमिश्नर के संज्ञान में आया था। उसके बाद यह घड़ियां बांटने का निर्णय लिया गया था। बिना घड़ी के काम करने वाले कर्मचारी की अप्रैल से सैलरी काटने की भी बात कही थी। घड़ी खो जाने पर आठ हजार रुपये का जुर्माना कर्मचारी को देने का भी निर्णय हुआ। एक घड़ी का किराया 466 रुपये है। इस हिसाब से एक माह का 18 लाख 64 हजार रुपये मासिक किराया देना होगा। कंपनी से तीन साल के लिए अनुबंध किया है। परिणाम बेहतर दिखे तो दो साल के लिए अनुबंध बढ़ाया जा सकता है। बाजार में एक घड़ी की कीमत लगभग 10 हजार से ज्यादा की है।
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