चंडीगढ़। केंद्र सरकार से ग्रामीण विकास फंड की ग्रांट न मिलने के बावजूद राज्य सरकार ने खस्ताहाल चल रही ग्रामीण सड़कों को सुधारने की रणनीति बनाई है। इस काम के लिए अब मंडी बोर्ड द्वारा नाबार्ड से बुनियादी ढांचा विकास फंड के तहत कर्ज लिया जाएगा। सूबा सरकार से इसके लिए मंजूरी ले ली गई है। वहीं, इस काम को सिरे चढ़ाने के लिए चार सदस्यीय कमेटी गठित की गई है, जो सड़कों की मरम्मत से जुड़े काम पर नजर रखेगी।राज्य में आम तौर पर छह साल के बाद सड़कों की मरम्मत की जाती है जबकि फंड की कमी के चलते इस काम में देरी हो रही है। ग्रामीण एरिया की सड़कों को ग्रुप ए, और बी में रखा जाता है। ए और बी कैटेगरी में उन सड़कों को शामिल किया गया है, जिनमें लोगों की आवाजाही अधिक रहती है। हालांकि माहिरों की माने तो नाबार्ड द्वारा सड़कों की मरम्मत के लिए लोन नहीं दिया जाता है। ऐसे में सड़कें चौड़ी करने के नाम पर लोन लिया जाएगा।
इससे पहले भी सरकार ने साल 2013-14 में सड़कों के लिए नाबार्ड स्कीम के तहत कर्ज लिया था। कांग्रेस सरकार के समय में 8400 किलोमीटर सड़कों के लिए 1080 करोड़ रुपये का कर्ज लिया गया था। हालांकि इससे पहले लिए लोन की किस्तें उतारने में भी मंडी बोर्ड को दिक्कत आ रही है। वित्त विभाग पंजाब ने 17 अगस्त को मंडी बोर्ड को पत्र लिखकर कहा कि जून 2023 की किस्त को 27 सितंबर से पहले भर दिया जाए ताकि डिफाॅल्टर कैटेगरी में जाने से बच सकें।
इन सड़कों की रिपेयर
सूत्रों से पता चला है कि जिन सड़कों की रिपेयर को सात साल हो चुके हैं, उनकी संख्या 2112 हैं। इन सड़कों की लंबाई 4280 किलोमीटर है। इनकी मरम्मत पर 693 करोड़ की लागत आएगी। 31 मार्च 2017 से पहले रिपेयर हुई सड़कों की संख्या 3936 है, जबकि लंबाई 2828 किलोमीटर है। इसके लिए 1400 करोड़ रुपये की जरूरत है। इसी तरह मंडी बोर्ड को सड़कों की मरम्मत के लिए करीब 2100 करोड़ की जरूरत है।