चंडीगढ़। हरियाणा में उद्योगों के भूजल निकालने के लिए सरकार नई नीति बनाएगी। धरातल से जल निकालने के लिए दरें भी नए सिरे से तय होंगी।
भूजल स्तर को सही बनाए रखने व जल संकट से निपटने के उद्देश्य से गठित ‘हरियाणा जल संसाधन प्राधिकरण’ की पहली बैठक शुक्रवार को चेयरपर्सन केशनी आनंद अरोड़ा की अध्यक्षता में हुई। बैठक में उन आवेदनों की समीक्षा की गई जो भूजल निकालने के लिए राज्य सरकार के पास अनुमति के लिए आए हुए हैं। एमएसएमई के तहत आने वाले ऐसे उद्योगों के लिए प्रारूप बनाने पर चर्चा हुई, जिनको प्रतिदिन 10 किलोलीटर से कम पानी की आवश्यकता होती है। इनके अलावा 100-500 किलोलीटर व इससे अधिक क्षमता बारे प्रारूप बनाने व खारा पानी के उपयोग के लिए नई नीति बनाने व दरें निर्धारित करने पर भी विचार-विमर्श किया गया।
बैठक के दौरान केंद्रीय भूजल बोर्ड प्राधिकरण के आवेदनों को हरियाणा जल संसाधन प्राधिकरण के साथ लिंक करने, जल संसाधनों से संबंधित विशेष मुद्दों को सुलझाने के लिए विभिन्न सलाहकार समितियां बनाने के अतिरिक्त राज्य में जलभराव के प्रभावी नियंत्रण के लिए योजना तैयार करने के संबंध में चर्चा हुई। प्रदेश में जल संसाधनों का सतत विकास एवं संरक्षण करने के लिए राज्य जल प्रबंधन योजना’ बनाने पर विचार किया गया। अरोड़ा वीडियो कांफ्रें सिंग के माध्यम से बैठक में जुड़ी। बैठक में प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. सतबीर सिंह कादयान, सदस्य डीपी बेनीवाल, मुखत्यार सिंह लांबा, कानूनी सलाहकार परवीन जैन व तकनीकी परामर्शदाता अनिल भाटिया उपस्थित रहे।