चंडीगढ़ बाल भवन में विंटर नेशनल थियेटर फेस्टिवल के छठे दिन प्रख्यात समाज सेवी व मरणोपरांत अशोक चक्र विजेता नीरजा भनोट के बड़े भाई अनीश भनोट ने युवा रंगकर्मियों के साथ अपने अनुभव साझा किया। अनीश भनोट ने बताया कि तीनों भाई बहनों में वह मझले भाई थे। वह अपने बड़े भाई अखिल को प्यार से मुन्ना और छोटी बहन नीरजा को प्यार से लाडो बुलाते थे।
पिता के मुंबई ट्रांसफर के बाद उनका परिवार मुंबई आ गया। नीरजा के साथ जीवन से जुड़े एक किस्से को उन्होंने बताया कि एक बार वह दोनों भाइयों के साथ स्कूटर पर सवार होकर कहीं जा रही थी तो सड़क किनारे एक दंपति के झगड़े में बीच बचाव करने चली गई। अपने भाइयों द्वारा इसके लिए टोके जाने पर 17 वर्षीय नीरजा ने कहा कि जिंदगी चाहे एक दिन की हो या दस साल की या पचास साल की, उनको दबाव वाली जिंदगी स्वीकार नहीं।
अनीश ने दिल को दहला देने वाले उस हाइजैक से जुड़े किस्से को बताया कि इस हादसे से एक हफ्ते पहली नीरजा, लंदन से ट्रेनिंग लेकर लौटी थी। कराची से होकर न्यूयॉर्क जा रही फ्लाइट में जब उनका सामना चार आतंकवादियों से हुआ तो उन्होंने इसी ट्रेनिंग के बदौलत अपनी जान की परवाह न करते हुए चार सौ से ज्यादा लोगों की जान बचाई। इसके लिए उनको मरणोपरांत अशोक चक्रसे सम्मानित किया गया। परिवार ने अपने घर का नाम नीरजा निवास रखा। अनीश के अनुसार नीरजा की पसंदीदा कार आज भी उस घर में है।
नीरजा पर फिल्म प्रोडक्शन किस्सों को साझा करते हुए उन्होंने कहा कि एक दिन जाने माने बॉलीवुड फोटोग्राफर अतुल कासबेकर का उनके बड़े भाई अखिल को फोन आया की वह नीरजा की बायोपिक के संबंध में उनसे मिलना चाहते है। मुंबई में मिलना तय हुआ। अनीश ने बताया कि वह दोनों न कहने के इरादे से गए थे, पर पूरी टीम की गुजारिश पर उन्होंने इन दो शर्तो पर हामी भर दी की स्क्रिप्ट का चयन वह खुद करेंगे और वह भी यदि मां की रजामंदी हुई। मां की मंजूरी के बाद पूरी टीम का चंडीगढ़ आना तय हुआ और फिल्म बन कर तैयार हुई।
फिल्म बनने तक पूरा परिवार असमंजस में था कि फिल्म को लेकर कैसी प्रतिक्रिया होगी, लेकिन जब फिल्म रिलीज हुई तो पूरे परिवार की आंखों में ख़ुशी के आंसू थे। यहां तक की शबाना आजमी के लंबे करिअर में यह भूमिका यादगार बन गयी। अनीश भनोट ने कहा कि अब उन्होंने इंसपायरिंग इंडियंस वर्ल्ड वाइड नामक किताब लिखने की शुरुआत की है।