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राजनीतिक प्रतिशोध की वजह से मतदाता सूची में नाम शिफ्टेड श्रेणी में डाला : राघव

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आप छोड़कर भाजपा में जाने के बाद से पंजाब सरकार पर निशाना बनाने का आरोप
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आप का पलटवार- एसआईआर चुनाव आयोग कराता है, सरकार की नाम जोड़ने-काटने में कोई भूमिका नहीं
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब से भाजपा के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा का नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची में परमानेंटली शिफ्टेड दर्ज होने के बाद सियासी विवाद खड़ा हो गया है। चड्ढा ने इसे सामान्य लिपिकीय गलती मानने से इन्कार किया है। उन्होंने पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार पर राजनीतिक प्रतिशोध का आरोप लगाया है।
चड्ढा का कहना है कि उनका वोटर आईडी मोहाली में पंजीकृत है, फिर भी उन्हें मतदाता सूची में स्थानांतरित दिखाया गया। वह विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत उपलब्ध उपायों का इस्तेमाल कर रहे हैं। पंजाब में दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तारीख 12 सितंबर है। अंतिम मतदाता सूची 12 अक्तूबर को प्रकाशित होनी है। चड्ढा ने चुनाव आयोग की एसआईआर गाइडलाइन के पैरा 4(डी) का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका के सदस्यों और जनप्रतिनिधियों के नाम ड्राफ्ट सूची में शामिल रखने का प्रावधान है। उनका आरोप है कि चिह्नित होने के बावजूद उनका नाम ड्राफ्ट सूची से बाहर किया गया।
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राजनीतिक दबाव के आरोप :

चड्ढा ने आरोप लगाया कि चुनावी पुनरीक्षण में काम करने वाले अधिकारी राज्य सरकार की मशीनरी का हिस्सा हैं। उनके तबादले और तैनाती सरकार के नियंत्रण में होते हैं। इसी वजह से अधिकारियों पर राजनीतिक दबाव की आशंका रहती है। उन्होंने दावा किया कि आप छोड़कर भाजपा में आने के बाद उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। चड्ढा अप्रैल 2026 में छह अन्य आप राज्यसभा सांसदों के साथ भाजपा में शामिल हुए थे।
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आप का पलटवार :

पंजाब सरकार के मंत्री अमन अरोड़ा ने राघव के आरोपों का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि वोट बनाने या हटाने का काम सरकार नहीं, चुनाव आयोग करता है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यदि पंजाब में भी एक प्रवासी का नाम कट गया तो इसमें हल्ला क्यों मचाया जा रहा है। वित्तमंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि वोटर लिस्ट तैयार करने की प्रक्रिया चुनाव आयोग के तहत होती है, राज्य सरकार के तहत नहीं। आप नेता अनुराग ढांडा ने भी कहा कि यह प्रक्रिया भारतीय चुनाव आयोग के अधीन है।
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