माई सिटी रिपोर्टर
पंचकूला। सेक्टर-6 सिविल अस्पताल में मोबाइल और लैपटॉप के अत्यधिक इस्तेमाल से बच्चे और युवा मायोपिया (निकट दृष्टि दोष) का शिकार हो रहे हैं। रोजाना ओपीडी में तीन सौ मरीज आ रहे हैं। इसमें 60 बच्चे इस बीमारी से पीड़ित आ रहे हैं। डॉक्टरों के अनुसार बच्चों की आंखों में मोबाइल और लैपटॉप की स्क्रीन बुरा प्रभाव डाल रही है। सिविल अस्पताल की आई ओपीडी में रोजाना 60 मरीज आ रहे हैं। इसमें 30 बच्चे और 30 के करीब युवा हैं।
पंचकूला सिविल अस्पताल के नेत्र रोग विशेष डॉ. जगदीप सिंह ने बताया कि कोविड-19 महामारी के बाद मोबाइल और लैपटॉप का इस्तेमाल अधिक होने के कारण यह मामले बढ़ गए हैं। इसमें आने वाले केस में पूरी तरह काउंसलिंग में यह पता चलता है कि बच्चे चार घंटे तक लगातार मोबाइल और लैपटॉप की स्क्रीन देख रहे हैं। इस कारण उनकी आंखों में अधिक असर पड़ रहा है। उन्हें मायोपिया हो रहा है। इस बीमारी में दूर की चीजों को देखने में परेशानी के मामले आ रहे हैं। इसमें बच्चों को लगातार स्क्रीन देखने के लिए परिजन दे रहे हैं। जांच में सामने आया है कि बच्चे पढ़ाई के अलावा कार्टून, गेम्स अधिक खेल रहे हैं। इसमें 10 से 15 साल के बच्चे मोबाइल गेम्स का शिकार हैं। इस कारण यह समस्या हो रही है। बच्चे की डाइट में विटामिन-ए, डी, ई और ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर होना चाहिए।
ऑफिस के बाद मोबाइल पर गेम का बना है क्रेज
सिविल अस्पताल सेक्टर-6 के आई सर्जन डॉ. जगदीप सिंह ने बताया कि 20 से 35 साल के युवा ऑफिस में काम करने के बाद मोबाइल में गेम्स, फिल्म, शार्ट वीडियो देखते हैं। इस कारण उनको चश्मे लग रहे हैं। इसमें निकट दृष्टि दोष के मामले सामने आ रहे हैं। लोगों को चश्मे दूर की नजर कमजोर होने के कारण लग रहे हैं। मरीजों को सलाह दी जा रही है कि वे मोबाइल के बजाए खेल एक्टिविटी करें। विटामिन से भरपूर भोजन करें। बर्गर पिज्जा फूड से बचें।
इस तरह से मायोपिया से करें बचाव
बाहरी गतिविधियों को बढ़ावा देकर बचाव किया जा सकता है। इसके अलावा हर दिन बच्चों को कम से कम 2-3 घंटे बाहर खेलने के लिए प्रोत्साहित करें। मोबाइल स्क्रीन देखने का समय सीमित किया जाए। बच्चों को कंप्यूटर, टैबलेट और स्मार्टफोन का इस्तेमाल हर दिन दो घंटे से ज्यादा नहीं करना चाहिए। पढ़ते समय बच्चों के कमरे की रोशनी सही हो, इसका ध्यान रखें और उन्हें अंधेरे में फोन न चलाने दें।
बच्चों की आंखों की नियमित जांच कराना जरूरी है, ताकि मायोपिया के शुरुआती लक्षणों का पता चल सके और सही इलाज किया जा सके। कुछ आंखों की एक्सरसाइज भी मायोपिया को रोकने में मदद कर सकता है। इनमें आंखों को घुमाना, आंखों को बंद करके आराम करना और दूर की चीजों पर फोकस करना शामिल हो सकता है। अगर आंख में किसी प्रकार की कमी आती है तो लोगों को तुरंत जांच करवाना चाहिए।
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