चंडीगढ़। झुरीवाला से डंपिंग ग्राउंड को हटाने की मांग को लेकर दाखिल याचिका पर पंचकूला नगर निगम ने बताया था कि इसके लिए वैकल्पिक स्थान की पहचान की जा चुकी है। इस जानकारी पर हाईकोर्ट ने अब इस दिशा में आगे उठाए जाने वाले कदमों का ब्योरा तलब कर लिया है।
याचिका दाखिल करते हुए सिटीजन कमेटी हाउस ऑनर्स तथा शिवालिक विकास मंच के अध्यक्ष विजय बंसल की ओर से बताया गया कि पूरे पंचकूला का कचरा झुरीवाला में लाकर गिराया जा रहा है। प्लांट के लिए अभी तक कई मंजूरियां तक नहीं ली गई हैं। नियमों के अनुसार डंपिंग की जगह आबादी से कम से कम दो किलोमीटर दूर होनी चाहिए लेकिन झुरीवाला आबादी के बहुत करीब है। प्लांट स्थापित करने के लिए एनवायरमेंट क्लीयरेंस जरूरी है और अभी तक यह क्लीयरेंस नहीं ली गई है।
यह भी बताया कि यह कचरा वन क्षेत्र में डाला जा रहा है जिससे पर्यावरण पर बुरा असर हो रहा है। याची ने बताया कि इस क्षेत्र का भू-जल लगातार प्रदूषित हो रहा है और ऐसे मेंं इसके अध्ययन के लिए शोध की आवश्यकता है। याचिका में अपील की गई कि वन क्षेत्र में कचरा फेंकने के लिए जिम्मेदार लोगों पर जुर्माना लगाया जाए। इस प्लांट को लेकर दायर याचिका पर हरियाणा सरकार ने कहा था कि जब तक सभी मंजूरियां नहीं ली जाती जब तक प्लांट नहीं लगाया जाएगा। अभी तक मंजूरियां नहीं ली गई हैं और कचरा लगातार गिराया जा रहा है।
इसके साथ ही यह भी बताया कि स्थानीय एमएलए ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है कि इस स्थान पर प्लांट न लगाया जाए और किसी अन्य स्थान का चयन किया जाए। इसके बावजूद नियमों को अनदेखा कर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। नगर निगम ने पिछली सुनवाई पर कहा था कि इस स्थान का प्रयोग अब डंपिंग ग्राउंड की तरह नहीं हो रहा है। यहां पर नया कचरा आता है और उसे प्रोसेस किया जाता है। साथ ही प्रोसेसिंग प्लांट को स्थापित करने के लिए वैकल्पिक स्थान को खोजा जा रहा है।