चंडीगढ़ से भाजपा सांसद किरण खेर ने उच्च न्यायालय के फैसले में अपने लिए रियायत देने की मांग की है। सांसद ने यूटी प्रशासक को पत्र लिखकर कहा है कि जन समस्याओं को लेकर वे पूरे ट्राइसिटी में घूमती हैं, इसलिए उनकी कार में झंडा और पदनाम लिखे जाने की छूट दी जाए।
हाल ही में पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने सरकारी व गैर सरकारी वाहनों पर पदनाम और झंडा लगाने को अनुचित ठहराया था। साथ ही ऐसे वाहनों के खिलाफ चालान करने का फैसला सुनाया था। उच्च न्यायालय के इस फैसले के बाद यूटी में अधिकांश सरकारी व गैर सरकारी वाहनों से पदनाम या अन्य स्टीकरों को हटा लिया गया है।
अब यूटी की सांसद किरण खेर ने उच्च न्यायालय के इस फैसले में छूट को लेकर प्रशासक का दरवाजा खटखटाया है। सांसद ने पत्र लिखकर मांग की है कि वे एक जनप्रतिनिधि हैं। जन समस्याओं के निराकरण को लेकर वह पूरे ट्राइसिटी का भ्रमण करती हैं। यदि उनकी कार में भारत सरकार का झंडा या पदनाम नहीं होगा तो उन्हें जन समस्याओं के निराकरण में दिक्कत आएगी। प्रशासक से उन्होंने कार में एमपी लिखे जाने और एक झंडा लगाने की छूट दी जाए।
क्या था उच्च न्यायालय का फैसला
23 जनवरी को हरियाणा-पंजाब उच्च न्यायालय द्वारा यह अहम फैसला लिया गया था। इसमें न्यायालय ने आदेश दिया था कि कोई भी व्यक्ति सरकारी या गैर सरकारी वाहन पर चेयरमैन, वाइस चेयरमैन, प्रेस, पुलिस, अधिवक्ता या पदनाम व कार्यालय के स्टीकर नहीं लगाएगा। यदि कोई भी व्यक्ति ऐसा करते हुए पाया जाता है तो पुलिस को उसके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई किए जाने के निर्देश दिए थे। कोर्ट ने 72 घंटे में आदेश लागू करने के निर्देश दिए थे।