चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को साफ कहा है कि ई-चालान प्रणाली लागू करने में अब टालमटोल नहीं चलेगी। अदालत ने यह टिप्पणी पंजाब में ई-चालान के पूर्ण क्रियान्वयन को लेकर दायर याचिका की सुनवाई के दौरान की।
एनआईसी की ओर से बताया गया कि इस समय एचएलआर ई-चालान एप्लीकेशन केवल मोहाली में काम कर रही है। वजह यह है कि राज्य परिवहन विभाग ने अभी तक अन्य जिलों के लिए औपचारिक अनुरोध नहीं भेजे हैं। एनआईसी अधिकारियों ने कहा कि जिस भी जिले के लिए राज्य अनुरोध भेजेगा वहां एप्लीकेशन दो सप्ताह के भीतर सक्रिय कर दी जाएगी।
ई-चालान लागू करने की प्रक्रिया दो हिस्सों में बंटी है। पहला, सामान्य लाइन एप्लीकेशन जिसका सेटअप बिना ई-कमेटी की मंजूरी के तुरंत किया जा सकता है, बस राज्य को अनुरोध और बुनियादी इंफ्रास्ट्रक्चर देना होगा। दूसरा हिस्सा वह विशेष मॉड्यूल है जिसकी मांग राज्य ने की है और जिसके लिए ई-कमेटी की स्वीकृति जरूरी है। यह प्रक्रिया रजिस्ट्रार जनरल और हाईकोर्ट की टीम के माध्यम से आगे बढ़ाई जाएगी।
राज्य की ओर से पेश वकील ने बताया कि जालंधर और अमृतसर में ई-चालान से जुड़ा अधिकतर तकनीकी काम पूरा हो चुका है। लुधियाना में कैमरे और उपकरण इंस्टाल कर दिए गए हैं। उन्होंने माना कि कुछ तकनीकी दिक्कतों के कारण देरी हुई है लेकिन राज्य पूरी तरह प्रतिबद्ध है कि सभी जिलों में ई-चालान के लिए जरूरी ढांचा उपलब्ध कराया जाए।
अदालत ने स्टेटस रिपोर्ट पर भी नाराजगी जताई और पूछा कि पहले दाखिल रिपोर्टों में इन ताजा प्रगति बिंदुओं का जिक्र क्यों नहीं था। राज्य ने कहा कि ये विकास हाल में हुए हैं और जवाब देने के लिए अतिरिक्त समय चाहिए। कोर्ट ने इसे स्वीकार करते हुए भी सख्त रुख दिखाया और कहा कि अगली तारीख तक विस्तृत जवाब दाखिल करना होगा।
सुनवाई में यह सुझाव भी रखा गया कि रजिस्ट्रार जनरल को आवश्यक पक्षकार बनाया जाए ताकि पूरा मामला ई-कमेटी तक ठीक तरह पहुंच सके। एनआईसी ने एक बार फिर दोहराया कि मूल ई-चालान एप्लीकेशन तुरंत लागू की जा सकती है, बशर्ते राज्य औपचारिक अनुरोध भेज दे।
चीफ जस्टिस शील नागु और जस्टिस संजीव बेरी की खंडपीठ ने यह आदेश एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। याचिका में कहा गया था कि 2019 में मोटर व्हीकल एक्ट में संशोधन के बाद ई-चालानों की संख्या बढ़ गई है लेकिन चालान भरने के लिए अभी भी लोगों को अदालतों या दफ्तरों में शारीरिक रूप से उपस्थित होना पड़ता है। याचिका में तर्क दिया गया कि हरियाणा, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और चंडीगढ़ में राष्ट्रीय वर्चुअल कोर्ट पोर्टल पहले से लागू है जिससे लोग छोटे-मोटे चालानों का ऑनलाइन भुगतान कर सकते हैं। पंजाब में इस देरी को असमझ बताते हुए राज्यभर में व्यवस्था लागू करने की मांग की गई।