गर्मी में एसी छोड़कर पहली बार मैदान में आए अफसर, हालत देखकर भी नहीं पसीजेलोगों ने कहा-करोड़ों खर्च के बाद भी सड़कें 10 साल नहीं चलीं
सीवरेज लाइनें भी ध्वस्त, हादसों का खतरा बढ़ा विजिलेंस जांच और विधानसभा में मुद्दा उठाने का एलान
संवाद न्यूज एजेंसी
मोहाली। मोहाली में टूटी–धंसी सड़कों और सीवरेज की दुर्दशा पर एमएलए कुलवंत सिंह ने गमाडा और नगर निगम अफसरों को जमकर फटकार लगाई। चुनाव नजदीक आते ही एमएलए अफसरों को साथ लेकर ग्राउंड पर पहुंचे और कहा कि शायद पहली बार ये अफसर एसी दफ्तर छोड़कर गर्मी में मैदान में आए हैं लेकिन हालात देखकर भी नहीं पसीजे। बुधवार को हालात का जायजा लेते हुए विधायक कुलवंत सिंह ने अफसरों को जमकर फटकार लगाई। उन्होंने स्पष्ट कहा कि विजिलेंस जांच करवाई जाएगी और यह मुद्दा विधानसभा में उठाया जाएगा। कुलवंत सिंह ने एलान किया कि वह सीएम को भी लिखेंगे ताकि लापरवाही बरतने वाले अफसरों पर कार्रवाई हो।
एमएलए कुलवंत सिंह ने साफ कहा कि गमाडा और निगम के अफसर फील्ड में काम करने के बजाय दफ्तरों में फाइलें घुमाते हैं। जगह-जगह से धंसी सड़कें, टूटे पैच और सीपी-67 चौक का धंसना शहर की हालत बयान कर रहा है। उन्होंने चेताया कि अगर अब भी हालात नहीं सुधरे तो वह जनता के साथ मिलकर बड़ा आंदोलन करेंगे।
एमएलए का कहना है कि अफसरों की लापरवाही और ठेकेदारों की मिलीभगत से ही शहर की सड़कें बार-बार धंस रही हैं। कई बार मीटिंग्स हुईं लेकिन जमीनी हाल जस के तस हैं। कुलवंत सिंह ने कहा कि मॉडल सिटी मोहाली का हाल गांवों से भी बदतर हो गया है। अगर रवैया यही रहा तो जनता का गुस्सा भड़कना तय है।
कई मुख्य सड़कें धंस चुकीं
मोहाली की कई मुख्य सड़कें धंस चुकी हैं। सीपी-67 चौक इसका बड़ा उदाहरण है, जहां रोज लाखों लोगों की आवाजाही होती है। एमएलए ने कहा कि करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी अगर सड़कें नहीं टिक पाईं तो इसकी सीधी जिम्मेदारी अफसरों और ठेकेदारों की है। उन्होंने जनता के साथ मिलकर अफसरों से जवाब लेने का एलान किया।
बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल रहीं
लोगों का कहना है कि बरसात में गड्ढों की वजह से हालात और खराब हो जाते हैं। टैक्स समय पर देने के बावजूद उन्हें बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल रहीं। लोगों ने चेतावनी दी है कि अगर मरम्मत कार्य जल्द नहीं शुरू हुआ तो वे सड़कों पर उतरकर विरोध करेंगे। रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन भी इस मुद्दे पर एकजुट हो रही हैं। जनता का कहना है कि अफसरों को दफ्तर की कुर्सी छोड़कर जमीनी हालात देखने चाहिए तभी तस्वीर बदलेगी। करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद सड़कें 10 साल भी नहीं टिक पाईं। धंसी सड़कों पर रोज हादसों का खतरा बना रहता है।