पंचकूला। ताऊ देवीलाल स्पोर्ट्स कांप्लेक्स में खेल महाकुंभ के दूसरे दिन रविवार को जहां कई खिलाड़ी महंगे स्पाइक्स और ब्रांडेड कोचिंग के सहारे ट्रैक पर उतरे, वहीं सिरसा के मांगे राम ने दोस्त के जूते पहनकर ऐसी छलांग लगाई कि उसे राज्य स्तर का रजत पदक विजेता बना दिया। लॉन्ग जंप में यह पदक उसकी मां की मजदूरी, अधूरी डाइट और कभी न हार मानने वाले दिल की जीत थी। जहां लोग पदक जीतने के बाद कहानी लिखते हैं, मांगे राम तो कहानी जीकर मेडल जीतने वाला खिलाड़ी है। आठ साल की उम्र में स्कूल के डीपी सर ने उसे ट्रायल देने को कहा, तब से लेकर आज तक वह रुके नहीं।
डाइट का सपना, डेयरी में फ्री काम कर किया पूरा
पिता की मौत के बाद मांगे के परिवार पर कहर टूट पड़ा लेकिन उसकी मां ने हिम्मत नहीं हारी। बेटे को पालने के लिए मजदूरी तक की। बेटे के सपने को साकार करने के लिए मां ने कई कष्ट सहे, आज उसका उन्हें फल मिल गया है। मांगे राम के पास आज न कोई स्पॉन्सर है, न कोई सप्लीमेंट। वह डेयरी में फ्री में काम करता है ताकि बदले में उसे दिन में दो बार दूध और पनीर मिल सके।
वकील दोस्त ने पेश की दोस्ती की मिसाल
मांगे राम के सबसे करीबी दोस्त एडवोकेट पवन कुमार ने हर मुश्किल वक्त में उसे हिम्मत दी है। खेल के मैदान से लेकर सफर तक में उसका साथ दिया है। यही वजह है कि मांगे राम अपने जैसे खिलाड़ियों को भी तैयार कर रहा है और उन्हें निशुल्क ट्रेनिंग दे रहा है।