चंडीगढ़। आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब के प्रधान व सांसद भगवंत मान ने कहा कि नशा तस्करी मामले में अकाली नेता बिक्रम सिंह मजीठिया को मिली जमानत कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल (बादल) की मिलीभगत का नतीजा है, क्योंकि आम आदमी पार्टी शुरू से ही कांग्रेस सरकार पर मजीठिया को नशा तस्करी के मामले में बचाने के आरोप लगाती आई है। चीमा ने कहा कि उच्च न्यायालय के आदेश के बाद गठित उच्च स्तरीय कमेटी द्वारा नशा तस्करी मामले की जांच की गई थी जिसकी रिपोर्ट में अकाली नेता का नाम सामने आया था, लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने मजीठिया के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की और न ही मौजूदा मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने कोई ठोस कार्रवाई की है।
सोमवार को जारी एक बयान में भगवंत मान ने कहा कि आम आदमी पार्टी द्वारा सड़क से लेकर विधानसभा तक नशा तस्करों के खिलाफ कार्रवाई करने के साथ साथ लिफाफे में बंद नशा तस्करी जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की मांग भी की जा रही है ताकि नशा तस्करी में शामिल कांग्रेस और अकाली दल के बड़े नेताओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सके। उन्होंने कहा कि चुनावों को नजदीक आता देख चन्नी सरकार ने चुनावी स्टंट के तहत मजीठिया के खिलाफ कमजोर एफआईआर दर्ज की थी ताकि उसे जमानत मिल सके। इसलिए अदालत से मजीठिया को जमानत मिलने से साफ हो गया है कि पंजाब की जवानी को नशे की ओर धकेलने वाले अकाली और कांग्रेसी आपस में मिले हुए हैं। मजीठिया के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कांग्रेस पार्टी और चन्नी सरकार इस पूरे प्रकरण को इस तरह पेश कर रही है, जैसे प्रदेश के सभी छोटे-बड़े नशा तस्करों को सलाखों के पीछे डाल दिया हो। लेकिन अब साफ हो गया है कि न तो ड्रग का काला कारोबार कम या बंद हुआ और न ही किसी बड़ी मछली को काबू किया गया है।
मान ने कहा कि श्री गुटका साहिब की कसम खाकर पंजाब से चार हफ्तों में नशा खत्म करने के वादे से भाग रहे कांग्रेसी अपनी जवाबदेही से नहीं बच सकते। जनता की अदालत में सभी कांग्रेसियों को श्री गुटका साहिब जी की बेअदबी का उसी प्रकार हिसाब देना पड़ेगा।