माई सिटी रिपोर्टर
पंचकूला। माइंड वेदा और बिफमा के मासिक कार्यक्रम में चंडीगढ़, पंचकूला और मोहाली के गायकों ने भाग लिया। माइंड वेदा के संस्थापक आचार्य कंवल बिंदुसार ने बताया कि कार्यक्रम के आयोजन का मकसद गायकों को एक प्रोफेशनल मंच देना है। कार्यक्रम की शुरुआत कृषिता बिंदुसार के स्पिरिचुअल वाइब्रेशन और आचार्य कंवल बिंदुसार के ओम के तीन बार के उच्चारण से हुई। आचार्य कंवल बिंदुसार ने किशोर कुमार का गाया ‘लहरों की तरह यादें’ गीत बेहतरीन अंदाज में पेश किया।
कृषिता बिंदुसार ने बेटियों को समर्पित ‘परी हूं मैं...’ गीत पेश किया। कार्यक्रम में लाइव सिंगिंग वर्कशाप की घोषणा की गई। बिफमा म्यूजिक के अंतर्गत तैयार विभिन्न प्रकार के गीतों को भी पेश किया गया। वरिष्ठ वर्ग में हरिपाल ने... मुझे पीने का शौक नहीं, दीपक भटनागर ने... किसी की मुस्कुराहटों पे हो निसार, पलविंदर सिंह ने... ऐ मेरे दोस्त लौट के आ, गुलशन सोनी ने...आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे, विनय कुमार ने... नव कल्पना नव रूप से, वीरेंद्र कुमार ने... तुम्हें याद होगा कभी हम मिले थे, शांति सरूप ने... इतना तो याद है मुझे, पवन कुमार ने...रिमझिम के गीत सावन गाए, गुरविंदर सिंह ने... अकेले अकेले कहां जा रहे हो, वेदव्रत खुराना ने... ना तुम हमें जानो, विनय कुमार ने... दिल ऐसा किसी ने मेरा तोड़ा, नरेश कुमार सैनी ने... बदन पे सितारे लपेटे हुए, लिली गुप्ता ने... सात समुंदर पार मैं तेरे, पीयूष ने... जब से तेरे नैना, संजय बख्शी ने... खिलते हैं गुल यहां गीत पेश किए।
जूनियर वर्ग में नयनजिता ने... आओ ना, अनन्या दत्त शर्मा ने... किसी ने अपना बना के मुझको, नैन्सी ने... ताल से ताल मिला, सना कोहली ने... आज रज्ज रज्ज के गीत प्रस्तुत किए। इस कार्यक्रम में पिछले कार्यक्रमों के विजेता पलविंदर सिंह, गुरविंदर सिंह, नरेश कुमार सैनी, पीयूष तथा विनय कुमार को पुरस्कार भी दिए। कार्यक्रम के अंत में ज्यूरी मेंबर कश्मीर चंद और आचार्य कंवल बिंदुसार ने पुरस्कारों की घोषणा की। इसमें वरिष्ठ श्रेणी में संजय बख्शी को प्रथम, गुरविंदर सिंह और विनय कुमार को द्वितीय जबकि पलविंदर सिंह और नरेश कुमार सैनी को तृतीय पुरस्कार के लिए चुना गया। पवन कुमार को प्रोत्साहन पुरस्कार के लिए चुना गया।