अब कालका शिमला मार्ग पर टॉय ट्रेन की गति निर्धारित से जरा भी तेज हुई तो आपको चिंता करने की जरूरत नहीं। क्योंकि हादसों को रोकने के लिए ट्रेन में आटोमैटिक ब्रेक सिस्टम लगाया गया है। यह सिस्टम ट्रेन की गति को एक निश्चित सीमा से ज्यादा होने पर एक्टिव हो जाएगा। सिस्टम ड्राइवर को सचेत भी करेगा और इसके बाद भी ड्राइवर ने ब्रेक नहीं लगाई तो खुद ब्रेक लग जाएगी। यह कदम रेलवे ने सितंबर 2015 में टॉय ट्रेन हादसे के मद्देनजर उठाया है।
23 की स्पीड के बाद बजेगा अलार्म
कालका शिमला रेल मार्ग पर जैसे ही ट्रेन की रफ्तार 23 किमी तक पहुंचेगी तो पहले अलार्म बजेगा। इससे ट्रेन के ड्राइवर और गार्ड सचेत हो जाएंगे। अगर तकनीकी खराबी की वजह से वह ट्रेन को नहीं रोक पाते हैं और ट्रेन की रफ्तार 27 किमी प्रतिघंटा तक पहुंच जाती है तो आटोमैटिक ब्रेक लग जाएगा।
कब हुआ था, हादसा
कालका शिमला मार्ग पर सितंबर 2015 में कालका-शिमला टॉय ट्रेन के दो डिब्बे पटरी से उतर गए थे। इस दुर्घटना में दो ब्रिटिश पर्यटकों की मौत हो गई थी, जबकि सात घायल हुए थे। उस समय ट्रेन में 37 विदेशी पर्यटकों का एक समूह था। दुर्घटना में जीवित बचे एक व्यक्ति ने पुलिस को बताया था कि एक मोड़ पर रेलगाड़ी की अत्यधिक गति से दुर्घटना हुई। इसके बाद रेलवे ने यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ऑटोमेटिक ब्रेक सिस्टम लगाने का फैसला लिया था।
कोट्स
टॉय ट्रेन के सभी इंजनों में ऑटोमैटिक ब्रेक सिस्टम लगाया गया है। 23 किमी की रफ्तार पर ट्रेन पहुंचेगी। ड्राइवर और गार्ड के पास अलार्म बजेगा। अगर उसके बाद भी ड्राइवर ट्रेन को नहीं रोक पाया तो ट्रेन की रफ्तार जैसे ही 27 किमी पहुंचेगी वहीं ऑटोमैटिक ब्रेक लगेगा और ट्रेन रुक जाएगी।
दिनेश कुमार, डीआरएम अंबाला मंडल रेलवे